​कहीं देखा नहीं होगा आपने ऐसा रावण वध, होता है भीषण संग्राम

इससे पहले ना आपने ऐसे रावण को मरते ना देखा होगा और ना सुना होगा, 
जालौन। पूरे देश में दशहरा का पर्व मंगलवार को मनाया जायेगा लेकिन बुन्देलखंड के जालौन जिले के कोंच नगर में दशहरा आज अलग परम्परा के साथ मनाया गया। यहाँँ पर बुराई के प्रतीक रावण और मेघनाथ के पुतले जलाये गये लेकिन कभी भी किसी ने राम-रावण और लक्ष्मण-मेघनाथ का इस तरह युद्ध नहीं देखा होगा। यहाँ पर राम-रावण और लक्ष्मण मेघनाथ का युद्ध अलग ही तरीके से होता है। यहाँ पर रावण मेघनाथ के 40 फिट ऊचे पुतलों का युद्ध राम और लक्ष्मण के साथ सजीव होता है और अंत में बुराई के प्रतीक के रूप में रावण और मेघनाथ का संहार राम-लक्ष्मण द्वारा किया गया। यह युद्ध कोंच के ऐतिहासिक मैदान धनु तालाब के मैदान पर होता है। इस युद्ध को देखने के लिये 20 हजार से अधिक की भीड जुटती है। 
164 वर्षों से चली आ रही यह परम्परा

वैसे पूरे देश में राम-रावण और लक्ष्मण-मेघनाथ के पुतलों को एक वटन दबाकर जला दिया जाता है लेकिन कोंच नगर में ऐसा देखने को नहीं मिलता है। यहाँ पर 164 वर्षों से चली आ रही परम्परा को कोंच के लोग अभी भी निर्वाहन कर रहे है। यहाँ पर राम-रावण और लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध परम्परागत तरीके से होता है। यहाँ पर राम और रावण का युद्ध सजीव होता है जिससे देखने के लिये दूर दराज के क्षेत्रों से लोग आते है। यहाँ रावण और मेघनाद के 40 फिट से ऊंचे पुतलो को बड़े-बड़े पहियों वाले रथ में बांधा जाता है और इन पुतलों को पूरे मैदान में दौड़ाया जाता है। जिनसे युद्ध स्वयं भगवान राम और उनके अनुज भ्राता लक्ष्मण करते है। 
छोटे-छोटे बालक बनते है राम-लक्ष्मण-सीता

आयोजन कराने वाले आयोजक विज्ञान विशारद सीरौठिया ने बताया कि यह रामलीला कर्मकांडी रामलीला है यहाँ पर राम-लक्ष्मण-भरत-शत्रुहन और सीता का किरदार छोटे-छोटे बालक करते है जिनको हम भगवान ही मानते है। यहाँ पर सभी युद्ध सजीव होते है। यहाँ पर किसी भी बाहरी कलाकर को नहीं बुलाया जाता है जो भी पात्र होते है वह लोकल के ही होते है। इसके अलावा धनुताल के मैदान पर लंका भी बनाई जाती है यहाँ पर अशोक वाटिका में सीता माँ भी विराजमान रहती है इसके अलावा अयोध्या को भी बनाया गया था जहाँ पर भरत और शत्रुहन भी बैठे हुये दिखाई देते है।
प्रशासन द्वारा किये गये थे पुख्ता इंतेजाम

राम-रावण युद्ध को देखते हुये प्रशासन ने भी पुख्ता इंतेजाम किये थे। कोंच के उपजिलाधिकारी ने बताया कि यहाँ पर भारी मात्रा में पुलिस बल बुलाया गया था जिससे कोई अनहोनी न हो उन्होने बताया कि वास्तव में यहाँ की रामलीला बहुत ही अच्छी राम लीला है जो 164 साल से चली आ रही है।

✍✍✍ डॉ प्रियंक शर्मा,”खबर आपकी”

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