जिला जालौन में धड़ल्ले से बिक रहा है कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित तम्बाकू मिश्रित गुटका….

उरई-जालौन कोर्ट की रोक के बाबजूद जिला जालौन में धड़ल्ले से बिक रहा है मिश्रित मावा ( तंबाकू मिक्स गुटका )गुटका बनाने बालो के न तो मानक फिक्स किये है । बल्कि कोर्ट के आदेशों की खुले आम धज्जियां उड़ाने पर आदी है

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2012 को इंडियन डेंटल एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सरकार को गुटखे पर प्रतिबंध लगाने के लिए चौदह दिन का समय दिया था।
सरकार ने हाईकोर्ट से इसके लिए छह महीने का वक्त मांगते हुए इसे एक अप्रैल से लागू करने का समय तय कर दिया था।
इसके बाद एफडीए ने चार अक्टूबर, 2012 को गुटखे पर प्रतिबंध लगाने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था।
गुटखा लाबी की ओर से तीन केस सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए थे। इनमें प्रभु आस्था इंटरप्राइजेज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, मेसर्स फूट इंटरप्राइजेज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और विष्णु इंटरप्राइजेज बनाम यूनियन आफ इंडिया के तीन याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में एक अप्रैल को सुनवाई थी। इस वजह से सरकार ने नोटिफिकेशन को यथावत बनाए रखा, लेकिन कोर्ट के फैसले का इंतजार करते रहे।
आखिरकार एक अप्रैल को कोर्ट गुटका पर रोक भी लगा दी।


पान मसाले में तंबाकू मिलाना गैरकानूनी


उत्तरप्रदेश सरकार ने जिस खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम, 2011 का सहारा लेकर गुटखे पर एक अप्रैल से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी, उसके विनियम 2.3.4 के अनुसार किसी भी खाद्य पदार्थ में तंबाकू या निकोटीन का मिश्रण करना गैरकानूनी है।फिर में जिले कई नामचीन गुटके रोज कई नाम जैसे मोहित , राज ,वी आई पी, गणेश , शाई , आदि दुकानों में आसानी से मिलजाता है जिनके साथ अलग से आपको एक तम्बाकू का पैकेट भी दिया जाता है जिसमे गुटका खाने बाला बिना मानक के तम्बाकू मिलकर खा जाते है जो की कैंसर रोग को दावत देते है।

वहीं एफडीए केवल सादे पान मसाले का लाइसेंस इस एक्ट के तहत देता है। सादे पान मसाले को खाद्य पदार्थ का दर्जा दिया जाता है। गुटखे का कोई भी लाइसेंस इस एक्ट केतहत नहीं दिया जाता। इसलिए इसमें तंबाकू या निकोटीन मिलाकर गुटखा बनाना गैरकानूनी होता है। इस एक्ट का उल्लंघन करने पर जुर्माने और सजा का भी प्राविधान है। पुलिस कारवाही की बात करे तो पुलिस छोटे दुकानदारों को अपना खौफ दिखाकर बारे न्यारे कर लेती है और जो बड़े माफिया है उनका कुछ नहीं होता है अब देखना ये है कि नए आगंतुक एस पी श्री राकेश सिंह इसके लिए क्या ठोस कदम उठाते है यह उनके लिए भी चुनौती का विषय होगा।

👉 कुलदीप मिश्रा,खबर आपकी न्यूज़ 👈

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