जनपद जालौन में सिर्फ बीस पैथोलाॅजी और एक्स-रे लैब पंजीकृत…

★कुछ ही लैब्स के पास हैं ट्रेन्ड टेक्नीशियन 

★एक्स-रे लैब्स में नहीं है रेडियेशन रोधी वालपेंटिंग तथा टेक्नीशियन नहीं प्रयोग करता रेडियेशन रोधी ड्रेस 

उरई (जालौन)। जनपद जालौन में मात्र बीस की संख्या में पैथालाॅजी एवं एक्स-रे लैब पंजीकृत हैं। किन्तु सैंकड़ो की संख्या में गैर पंजीकृत लैबें बिना टेक्नीशिन के व्यवसाय करते हुए रोगियों को मौत के मुंह में पहुंचा रही हैं। किन्तु इनके विरूद्ध नोडल अधिकारी/अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ0 सत्यप्रकाश के स्तर से ना जाने क्यों अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। नोडल अधिकारी द्वारा दी गई पंजीकृत पैथालाॅजी सूची के मुताबिक अकेले उरई में बीस लैब पंजीकृत हैं, जबकि शेष लैबों में से दो कोेंच में, दो जालौन में तथा एक ग्राम बंगरा में अवस्थित है। जिले के तमाम मान्य सरकारी और गैर सरकारी चिकित्सक जब भी किसी रोगी के खून आदि की जांच के लिए लिखते हैं तो वह पेशेंट या उसके साथ आये परिजनों को खास लैब का नाम भी बता देते हैं। एैसा एक तो जांच के सही परिणाम के लिए किया जाता है, जो कि उचित ही है अथवा फिर लैब्स से मिलने वाली कमिशन की रकम के लिए। यदि रोगी किसी अन्य लैब से जांच की रिपोर्ट लेकर आता है तो चिकित्सक द्वारा उसे फेंक दिया जाता है, तथा कहा जाता है के जिस लैब पर भेजा था, उस पर जांच कराकर आओ तभी में इलाज कर सकूंगा। ज्यादातर पैथालाॅजीकल लैब्स पर ट्रेन्ड टेक्नीशियन ना होने से अजब गजब स्थिति है। वहां रोगी का ढेर सारा खून निकाल लिया जाता है। किन्तु उससे जांच नहीं की जाती, बस अपने मन से जांच परिणाम रिपोर्ट वाले प्रिन्टिड पेपर पर लिख दी जाती है। यदि चिकित्सक ऐसी फर्जी रिपोर्ट पर रोगी का उपचार करे तो रोगी का मृत्यु के मुख्य में जाना सुनिश्चित बन जाता है। एक्स-रे लैब्स जो घनी बस्ती के बीच स्थित हैं में रेडियेशन रोधी वालपेंटिग ना होने से एक्स-रेज का दुष्प्रभाव आसपास के रहने वाले लोगों पर पड़ता है। रेडियेशन रोधी ड्रेस पहने बिना एक्स-रे करने वाला प्रशिक्षित/अप्रशिक्षित टेक्नीशियन अपने आप को रेडियेशन से नहीं बचा पाता और वह धीरे-धीरे विकलांग होने लगता है। जिसका प्रमाण जिला पुरूष चिकित्सालय में डाॅ0 की डिग्री प्राप्त संभवतः पी0सी0 चन्देल हैं, जिनकी कि एक्स-रेज से प्राप्त घातक रेडियेशन के कारण अकाल मृत्यु हो गयी थी।  किन्तु यह सब जानते हुए भी स्वास्थ विभाग / नोडल अधिकारी स्तर से संज्ञा शून्यता बनाये रखना तथा अपने उत्तरदायित्व का पालन करते हुए अवैध पैथालाॅजी की लैब तथा एक्स-रे लैब पर कठोर कार्यवाही कर उन्हें बन्द ना कराना, उनके विरूद्ध थाने में प्राथमिकी दर्ज ना कराना, सोचने पर विवश करता है कि कहीं इस जानलेवा अवैध व्यवसाय की पृष्ठभूमि में माहबारी रकमों की बसूली तो नहीं की जा रही।

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