पहले सूखे की मार अब नोट की हार, किसानों की खेती हो रही बेकार ….

रिजर्व बैंक के फैसले से टूटी किसानों की उम्मीद सहकारी बैंक से किसान नही जमा कर पा रहे नोट, 

खाद बीज का मिलना भी बन्द, खाद बीज के आभाव से कैसे कर पायेगें खेती 


जैतपुर (महोबा) सन्दीप कुमार : भारत सरकार भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 9 नवम्बर से 1000 व 500 के नोट को प्रचलन से बाहर करने और इन नोटों को जिला सहकारी बैंकों में बदलने और जमा करने से बाहर रखने से किसान ठगे से रह गये हैं। जबकि आम तौर पर देखा जाता है कि 80 प्रतिशत किसान सहकारी बैंक से जुडा है। इन्ही बैंकों के माध्यम से उसे खाद बीज के लिये ऋण प्राप्त होता है। 500 व 1000 के नोट बन्द होने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि बन्द नोट जमा कर या बदलकर खेती का काम कर लेगें। परन्तु रिजर्व बैंक ने इन बैंकों में पुराने नोट जमा करने पर पाबन्दी लगा दी है कि तब से किसान परेशान घूम रहा है। 

बुन्देलखण्ड का किसान सूखे की मार से सालों से सामना करता चला आ रहा है और आज भी वह कर रहा है। लगातार फसल खराब होने से किसान पूरी तरह कंगाल हो चुका है। इस वर्ष अच्छी फसल होने की उम्मीद जागी थी तो खेती के लिये किसानेां ने ऋण स्वरूप धन लिया था। लेकिन किसी तरह से सहकारी बैंक से जुडे होने के कारण उसे काफी राहत मिल रही थी। लेकिन इसी बीच रिजर्व बैंक ने आदेश भेजकर 14 नवम्बर से सहकारी बैकों में 1000 व 500 के नोट जमा करने पर पाबन्दी लगा दी है तो किसानों की परेशानी और बढ गयी है। किसानों के पास जो पुराने नोट रखे हैं उसे जमा नही कर पायेगें तो दूसरे नोट नही मिलेगें। और तब किसान खादबीज भी नही ले पायेगें तो खेती का क्या होगा। कहना मुश्किल है। रिजर्व बैंक के फैसले से किसान इस समय बहुत दुखी है। क्योंकि उनके खातों में वैसे भी धन नही है। खेती के लिये पूर्व में सिंचाई, बुवाई, जुताई, खाद बीज के लिये जो ऋण ले रखा था वही पूंजी उसके पास थी। अब वह जमा नही हो पायेंगी तो उसके सामने घोर समस्या खडी हो गयी है। समस्या क्यों न खडी हो पुराने नोट न जमा हो पाने को लेकरजैतपुर ब्लाक के ग्राम विहार के एक किसान नरेंद्र राजपूतसे बात की तो उसने जवाब देते हुये कहा कि किसानें के हित को ध्यान में रखकर कोई भी निर्णय लिया जाना चाहिये था किसान परेशान न हो इसके लिये सारे उपाय होना चाहिये। यदि किसान परेशान हुआ तो बात नही बनेगी। 

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