बिना टैक्सी परिमिट के खड़े होते है सैकड़ो वाहन, नजर नहीं आता यातायात पुलिस या सम्बन्धित अधिकारियों को…

★टाउन हॉल के पास अनगिनत प्राइवेट लक्जरी करें करती है अपनी बुकिंग का इंतज़ार

★यातायात माह सिर्फ आम जनता के प्राइवेट छोटे वाहनो के लिए होते हैं


उरई (जालौन) वर्तमान में यातायात माह की कार्यवाहियां तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार प्रगति पर हैं। किन्तु जगह-जगह अवैध टैक्सियों केे स्टैण्ड और उरई नगर के मध्य में जजी के सामने 10 बजे सुबह से शाम 05 बजे तक यात्री बसें चार पहिया वाहनों और मोटर साईकिल स्टैण्ड के कारण होने वाले यातायात के सामने जारी यातायात माह को हाथी के दिखावटी दाँत जैसा बना दिया है। जिला चिकित्सालय के सामने तथा टाउन हाॅल पर अवैध टैक्सी स्टैण्ड भी यातायात जामकर नगर में लोगों का चलना फिरना मुहाल किये हुए हैं। यह ठीक है कि यातायात माह में छात्र छात्राओं, ट्रान्सपोटर्स, बस आॅपरेटर्स और नागरिकों को यातायात नियमों की जानकारी देकर सुरक्षित यातायात के लिये प्रशिक्षित किया जाता है। किन्तु प्रतिवर्ष नवम्बर माह में आयोजित किये जाने वाले यातायात माह के काई सकारात्मक परिणाम अभी तक नहीं निकले हैं। सिवाय इसके कि कार्यक्रम की प्रतिदिन की तस्वीरें समाचार पत्रों में छपवाली जाएं। 
उरई नगर सहित जनपद जालौन में हजारों की संख्या में अवैध टैक्सियां परिचालित हैं। जो प्रतिवर्ष करोडों रूपये के टैक्स की चोरियां कर रहीं हैं। इनमें से तमाम टैक्सियां उरई नगर में विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर खड़े रहकर ग्राहकों का इन्तजार करती हैं, इन टैक्सियों के मालिकों ने उन्हें कमर्शियल नहीं बनाया है और वह धड़ल्ले से प्रतिदिन व्यवसाय कर रहीं हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक जनपद जालौन में कोई ट्रेवल एजेन्सी भी पंजीकृत नहीं है और न ही काई टैक्सी स्टैण्ड भी विधिवत बनाया गया है। किन्तु इस सबके बाबजूद उरई नगर में कोंच रोड स्थित बस स्टैण्ड कालपी रोड पर जजी के सामने, राठ रोड पर मण्डी गेट के सामने जालौन रोड पर पुलिस आॅफिस गेट के सामने करमेर रोड पर देशी शराब ठेका के सामने, अजनारी रोड पर, कृष्णा धाम के सामने, जिला पुरूष एवं जिला महिल चिकित्सालय के गेट के सामने टाउन हाॅल के सामने जी0आई0सी0 जाने वाले मार्ग पर तथा चन्द्रा नर्सिंग होम के सामने अवैध टैक्सी स्टैण्ड संचालित हैं। किन्तु इस अवैध व्यवसाय के लिये मूल रूप से जिम्मेदार ए0आर0टी0ओ0 प्रवर्तन को यह टैक्सियां कभी नजर नहीं आतीं। वह उन्हें संचालित बनाये रखकर लाखोें रूपये के राजस्व की क्षति पहुंचा रहे हैं। खुद अवैध टैक्सी संचालकों का कहना है की वह मुफ्त में व्यवसाय नहीं कर रहें और कमर्शिल गाड़ी का जितना टैक्स होता है उसके आधे से अधिक रूपया वह प्रतिमाह परिवहन विभाग के जुम्मेबार अधिकारी तक पहुंचाते हैं। उनका यह कहना सत्य के अत्यधिक निकट नजर आता है। क्योंकि इन अवैध टैक्सियों का चालान न्यूनतम प्रतिशत में ही कभी-कभी किया जाता है। पुलिस भी इन अवैध टैक्सियों से वसूली का अपना एक सिलसिला बनाये हुये हैं और अवैध टैक्सियों के द्वारा तमाम मार्ग घेर लिये जाने के बाद भी उन पर डण्डे नहीं चटकाती है और न ही मार्ग खाली करने केे लिये खदेड़ती है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की गाड़ियां भी इन टैक्सियों द्वारा मार्ग घेरे जाने की स्थिति में फिर हूटर ही बजाते रह जाते हैं। अवैध कमाई के इस मकड़जाल में नगर का तमाम यातायात तब बाधित कर लिया है, जबकि यातायात पुलिस वरिष्ठ अधिकारियों के कुशल निर्देशन में लगातार सक्रिय बनी हुई है।

ऐसे में यातायात माह की प्रस्तुति हाथी के सफेद दाँत से अधिक कुछ नहीं कही जा सकती।

” जागो सम्बंधित अधिकारीयों जागो “

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