लखनऊ की चिकनकारी और जरदोजी पर नोटबंदी की मार …

लखनऊ,22दिसंबर :- दुनिया भर में मशहूर है लखनऊ की चिकनकारी और जरदोजी लेकिन नोटबंदी की गाज इस पर ऐसी गिरी है कि कारीगर काम को तरस गए हैं और दुकानदार ग्राहकों को, और आलम यह है कि खचाखच भरे रहने वाले बाजारों में सन्नाटा पसरा है। लखनऊ में अमीनाबाद और चौक जहां चिकनकारी के कपड़ों के पारंपरिक बाजार है, वहीं हजरतगंज में इसके कई लुभावने शोरूम है। वहीं सोने चांदी के धागों से कपड़े पर जरदोजी का काम पुराने लखनऊ में अकबरी गेट से गोल दरवाजे के बीच मुख्य रूप से होता है जहां पुराने कारीगर बसे हुए हैं। चौक पर छह दशक से भी पुरानी भगवत दास एंड संस दुकान के मालिक बीके रस्तोगी ने कहा, ‘‘हमारे 70 प्रतिशत कारीगर परेशान हैं और सर्कुलेशन में काफी दिक्कतें आ रही हैं। पिछले डेढ़ महीने में बिक्री 40 प्रतिशत गिर गई है। सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी पर काम करने वाले कारीगरों पर पड़ा है।’’
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता में चिकनकारी के कपड़े यहां से जाते हैं लेकिन वहां से भी मांग में गिरावट आई है। रस्तोगी ने कहा, ‘‘लखनऊ में पेटीएम इतना लोकप्रिय नहीं है और सभी लोग कार्ड से भी भुगतान नहीं करते। इसके अलावा बैंक से पैसा निकालने की जो सीमा तय कर दी गई है, उससे व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा है।’’ वहीं शाही शिफाखाना चौक पर 60 साल से जरदोजी का पुश्तैनी कारोबार चला रहे जफर अली वैसे ही धंधे में मुनाफा नहीं होने से परेशान थे और अब रही सही कसर नोटबंदी ने पूरी कर दी।

अली ने कहा, ‘‘हमारे यहां 12.13 कारीगर काम करते हैं और सभी को दिहाड़ी देनी होती है। इसके अलावा कच्चा माल नकदी पर ही मिलता है। नोटबंदी से दोनों में दिक्कतें आ रही हैं। मांग आधी से भी कम रह गई है। लखनऊ के बड़े शो रूम से आर्डर ही नहीं मिल रहे। लगन के मौसम में भी यह हाल है तो आगे की छोड़ ।

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