​उरई जालौन सुरक्षित क्षेत्र से शंभूदयाल पर दांव लगा सकती भाजपा …

★हार की हैट्रिक से नही उबर पा रहे गौरीशंकर 
उरई (जालौन) खबर आपकी :- विधान सभा क्षेत्र उरई जालौन सुरक्षित से भारतीय जनता पार्टी इस बार पूर्व कस्टम कमिश्नर शंभू दयाल पर दांव लगा सकती है। क्योंकि शंभूदयाल के अलावा भाजपा के पास ऐसे सूरमा की कमी बताई जा रही जो आसन्न विधान सभा चुनाव में उरई क्षेत्र से भाजपा की नैया पार लगा सके। हालांकि भाजपा से हार की हैट्रिक लगा चुके गौरीशंकर वर्मा के प्रति शायद ही पार्टी हाईकमान गंभीरता दिखा सके। 

 जनपद में विधान सभा चुनाव के नये परसीमन ने भाजपा एवं बसपा दोनों के समीकरण गड़बड़ा दिए है कोंच सुरक्षित क्षेत्र के खत्म हो जाने के बाद उरई जालौन विधान सभा क्षेत्र सुरिक्षत हो जाने से इन  दोनो दलों को जातीय समीकरण बैठाना मुश्किल हो रहा है। यहीं वजह है कि नये परसीमन के बाद भारतीय जनता पार्टी का जहां जनपद की तीनों विधान सभा क्षेत्रों सफाया हो गया था वहीं बहुजन समाज पार्टी को माधौगढ सीट पर संतराम कुशवाहा की जीत से संतोष करना पड़ा था जबकि कालपी एवं उरई विधान सभा क्षेत्र में उसके प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे। सबसे अधिक समस्याग्रस्त भाजपा दिखाई दे रही है। जातीय समीकरण के हिसाब से सभी को संतुष्ट कर पाना उसके लिए मुश्किल हो रहा है। पिछले विधान सभा चुनाव में उसने उरई जालौन सुरक्षित क्षेत्र से गौरीशंकर वर्मा को प्रत्याशी बनाया था लेकिन वह 45 हजार 349 वोट ही पा सके थे वह विजयी प्रत्याशी समाजवादी पार्टी के दयाशंकर वर्मा से करीब 17 हजार वोटों से पीछे रहे थे। जबकि बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी सत्येन्द्र पाल सिंह को 60 हजार 615 वोटों से संतोष करना पड़ा था। इसके पहले जब कोंच विधान सभा सुरक्षित क्षेत्र था भारतीय जनता पार्टी ने गौरीशंकर वर्मा को 2007 के विधान सभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया था। तब गौरीशंकर वर्मा को बसपा के अजय अहिरवार पंकज से पराजय का सामना करना पड़ा था। इसके पहले 1996 के विधान सभा चुनाव में भाजपा ने गौरीशंकर वर्मा को प्रत्याशी बनाया था तब उन्हें 24 हजार 590 वोट नसीब हुए थे और चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे थे इस तरह से 1996 एवं 2007 तथा 2012 के विधान सभा चुनाव में उन्हें पराजय का ही सामना करना पड़ा है। आसन्न विधान सभा चुनाव में भी उन्हें उरई सुरक्षित क्षेत्र से टिकट का दावेदार माना जा रहा है लेकिन तीन विधान सभा चुनाव में उनकी हार ही हैट्रिक पार्टी का हाईकमान हजम नही कर पा रहा। इस चुनाव में उरई क्षेत्र से गौरीशंकर के अलावा पूर्व कस्टम कमिश्नर चैधरी शंभूदयाल को प्रबल दावेदार माना जा रहा है और गौरीशंकर वर्मा की हार की हैट्रिक पर वह काफी भारी भी बताए जा रहे है इसके अलावा भाजपा में टिकट का ऐसा कोई दावेदार नही दिख रहा है जो भाजपा की नैया को पार लगा सके। कहने को तो भाजपा में होर्डिंग्स एवं बैनरवाज नेताओं की कमी नही है लेकिन पार्टी का बुद्धिजीवी वर्ग उन्हें गंभीर नही मानता ऐसे में अगर माना जाए कि उरई जालौन सुरक्षित क्षेत्र से भाजपा चैधरी शंभूदयाल को प्रत्याशी बनाती है तो यह कोई आश्चर्य की बात नही है। 

उरई जालौन क्षेत्र से चैधरी शंभूदयाल की प्रत्याशिता के पीछे भाजपा के बुद्धिजीवी वर्ग की सकारात्मक सोच यह भी मानी जा रही है कि इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने पूर्व विधायक अजय अहिरवार पंकज को प्रत्याशी बनाया है जिन का बहुजन समाज पार्टी में ही भारी विरोध है। बसपा का कार्यकर्ता भी उनके अहंकार के कारण अजय अहिरवार पंकज के टिकट काटे जाने की मांग करता आ रहा है वैसे भी भाजपा के मूलवोट बैंक में अजय अहिरवार पंकज की कोई अच्छी पकड़ नही है। ऐसे में भाजपा पूर्व कस्टम कमिश्नर चैधरी शंभूदयाल को प्रत्याशी बनाती है तो निश्चित ही बसपा के अजय अहिरवार के मुकाबले भाजपा से शंभूदयाल भारी पड़ सकते है। शंभूदयाल की प्रत्याशिता के पीेछे एक वजह और मानी जा रही है दरअसल वर्ष 2002 के विधान सभा चुनाव में कोंच विधान सभा सुरक्षित क्षेत्र से चैधरी शंभूदयाल की पत्नी सुशीला चैधरी ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था यह उनका पहला चुनाव था और इस चुनाव मंे भी सुशीला देवी 29 हजार 138 वोट पाकर तब भाजपा के दयाशंकर वर्मा से चुनाव हार गई थी लेकिन सुशीला चैधरी की प्रत्याशिता के आगे बहुजन समाज पार्टी के राजेन्द्र बाबू पिरौना को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था उन्हें मात्र 20 हजार 386 वोट ही मिल पाए थे। आसन्न विधान सभा चुनाव में भाजपा से अगर चैधरी शंभूदयाल को टिकट मिलता है तो निश्चित ही वह बसपा के अजय अहिरवार पंकज पर भारी पड़ सकते है। भाजपा का भी बुद्धिजीवी वर्ग इस बात को मानकर चल रहा है कि शंभूदयाल प्रत्याशी बनते है तो फिर उरई जालौन सुरक्षित क्षेत्र से भाजपा को कोई नही रोक पाएगा। 

हालांकि भाजपा में शंभूदयाल का चैधरी समाज से होना अब कमजोरी नही माना जा रहा है। भाजपा के लोगों का मामना है कि वर्ष 2002 में कालपी विधान सभा क्षेत्र से पार्टी ने डा. अरूण महरोत्रा को प्रत्याशी बनाया था तब यह प्रचार सामने आया था कि क्षेत्र में 52 वोट वाले अरूण महरोत्रा का विधायक बनना मुश्किल है लेकिन तक डा. अरूण महरोत्रा को 40 हजार 98 वोट मिले थे जिससे 52 वोटोें का जुमला गढ़ने वालों की बोलती बंद हो गई थी।
      ( स्पेशल रिपोर्ट @ कुलदीप मिश्रा )

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One thought on “​उरई जालौन सुरक्षित क्षेत्र से शंभूदयाल पर दांव लगा सकती भाजपा …

  1. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कालपी विधानसभा क्षेत्र ब्राह्मण चेहरा ही उतारा जाएगा

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