सरकारी दफ्तर की सीढ़ियों पर ठंड से बुजुर्ग महिला की मौत ….

★ कंबल के लिए पांच दिनों से लगा रही थी चक्कर 

सर्दियां आते ही सरकार और सरकारी महकमा बेघरों और गरीबों को इसके प्रकोप से बचाने के लिए कई तरह की योजनाओं की घोषणा करते हैं। लेकिन कई मौकों पर यह घोषणाएं मात्र कागजों पर सिमट कर रह जाती हैं क्योंकि इनका उपयुक्त लाभ उन लोगों तक नहीं पहुंच पाता जिन्हें इसकी सख्त जरूरत होती है। इस साल पूरे देश में ख़ास तौर पर उत्तर भारत और पहाड़ी राज्यों में ठण्ड का प्रकोप बहुत ज्यादा है।
जिनके सिर पर छत नहीं है वो अपने आप को इस ठण्ड से कैसे बचाएं यह सवाल नीना जबाब मिले ही खत्म हो जा रहा है। सरकारी कागजों में तो गरीबों और बेघरों में बाते जाने के लिए कम्बल हैं लेकिन असल में वो बेघर इन सुविधाओं से महर्रोम ही नजर आ रहे हैं। हर साल कितने ही लोग जो फुटपाथ पर जीने को मजबूर हैं कडाके की ठण्ड में दम तोड़ देते हैं।

ऐसी ही एक घटना कुछ दिन पहले झारखंड में घटित हुई हैं जहां एल 80 साल की बुजुर्ग महिला से कंपकपाती ठण्ड में कंबल ना मिल पाने के कारण सरकारी दफ्तर के सामने दम तोड़ दिया। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक यह घटना झारखंड के गढ़वा जिले की है जहां एक यह महिला पिछले पांच दिनों से कम्बल के लिए कलेक्ट्रेट के ऑफ़िस के चक्कर लगाती रही, लेकिन उसे कंबल नहीं मिल सका, इसके बाद ठंड लगने के कारण बुजुर्ग महिला ने दफ्तर की सीढ़ियों पर ही दम तोड़ दिया। 

यह घटना देखी जाए तो हमारे सिस्टम के लिए एक आम ही थी क्योंकि हमारे सिस्टम को इसके आदत हो गई है, हर साल न जाने कितने बेघर लोग ठण्ड के प्रकोप से अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। लेकिन यह अहम भी इसलिए हो जाती है क्योंकि हर साल ऐसे लोगों की सुरक्षा के लिए कई तरह के प्रयासों का क्रियान्वन किया जाता है, हालांकि ऐसा ज्यादातर कागजों में ही सिमट कर रह जाता है।
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कलेक्ट्रेट कर्मचारियों का कहना था कि वो इस महिला को कम्बल देने में असमर्थ थे और कम्बल न मिलने के कारण ठण्ड के कारण इस महिला ने ऑफ़िस के बाहर ही दम तोड़ दिया।

अखबार में छपी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, बुजुर्ग महिला के भतीजे सुरेश बिंद, जो पेशे से मजदूर हैं उनका कहना है कि, वो मेरी चाची थीं, चाचा भी नहीं हैं और उनका बेटा बंगाल में मजदूरी करता है। चाची किसी तरह अपना गुज़ारा कर रही थीं। वो पिछले पंद्रह दिनों से घर से यही कहकर निकलती थीं कि सरकारी दफ़्तर से कंबल लेने जा रही हूं। लेकिन रोज़ाना खाली हाथ ही लौटती थी।

वहीँ बुजुर्ग महिला की मौत के बाद जिले के एसडीओ राकेश कुमार का कहना था कि वृद्ध महिला की मौत उल्टी करने के कारण हुई थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वो बुज़ुर्ग महिला किस वजह से रोज उनके ऑफ़िस आ रही थी। उन्होंने तो सोमवार से पहले इस उस महिला को कभी नहीं देखा।

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