​जनपद में भी पेट्रोल पंपों पर घटतौली के मिले संकेत …

★ मशीनों में सेटिंग-गेटिंग का हो रहा प्रयोग
★ पांच लीटर के पीतल के नपने मेें खुल सकती है सच्चाई
उरई/जालौन। पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल की मिलावट का गोरखधंधा तो अरसे से सुनते आए कि साल्वेंट मिलाकर उपभोक्ता को गुमराह किया जाता रहा। अब जिस तरह से बड़े शहरों में चिप से पेट्रोल पंप संचालकों की वास्तविकता उजागर हुई है उससे यह क्षेत्र अछूता नहीं है। वहीं मशीनों में हेराफेरी के संकेत सुनने को मिले हैं। इनकी वास्तविकता जांचने के लिए जो इनके पास डिलीवरी मापक होता है उससे अगर पेट्रोल या डीजल डलवाया जाए तो जो उसमें ऊपर का छेद रहता है उससे पेट्रोल या डीजल बहने लगे तो मशीन द्वारा सही मात्रा में डीजल और पेट्रोल दिया जा रहा अन्यथा की स्थिति में कुछ न कुछ गड़बड़झाला है।
जनपद में दर्जनों पेट्रोल पंप स्थित हैं जिनकी सेलिंग अच्छी है परंतु वह उपभोक्ताओं को चूना लगाने से चूकते नहीं हैं। उपभोक्ता यह जान भी नहीं पाता कि उसके वाहन में पूरा पेट्रोल डीजल डाला गया या आधा-अधूरा। चूंकि पेट्रोल पंप संचालक हर गुर सीखे हुए हैं और वह आसानी से उपभोक्ता को गुमराह भी कर लेते हैं। हालांकि पेट्रोल पंप संचालकों से जब इस मामले में बात की तो उन्होंने बताया कि यहां ऐसे कोई पेट्रोल पंप नहीं हैं जिनकी सेल बहुत ज्यादा हो। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि पेट्रोलिंग कंपनियों ने मशीनें चेक की हैं और उन्हें कभी पर भी चिप लगने की जानकारी नहीं मिली है। इस मामले में जब जिला पूर्ति अधिकारी अशोक कुमार से वार्ता की तो उन्होंने कहा कि पेट्रोल पंपों की जांच के लिए एक टीम गठित की जा रही है जो हर बारीकी पर नजर रखेगी। वहीं प्रत्येक पेट्रोल पंप पर सही नाप के लिए एक पीतल का पांच लीटर वाला नपता रखा रहता है जिसमें ऊपर एक छेद होता है। पांच लीटर जैसे ही उस नपते में तेल आएगा तो उस छेद से वह तेल बहने लगेगा अगर तेल बहकर निकल रहा है तो उस पंप की नाप ठीक है अन्यथा की स्थिति में उसमें भी कुछ न कुछ गड़बड़झाला है। जिस तरह से चिप का खेल उजागर हुआ उसी तरह से मशीनों में भी जो गोरखधंधा चलता है वह भी किसी न किसी दिन उजागर हो सकता है। डीजल और पेट्रोल पर पेट्रोल पंप संचालकों को अच्छा-खासा कमीशन है। इतने कमीशन में इनका पेट भरता नजर नहीं आ रहा है। यही सब वजहें हैं कि बड़े-बड़े पंप संचालक इस चिप का फायदा उठाने से चूके नहीं हैं। चिप इस तरह से लगाई जाती है कि आम आदमी को जानकारी नहीं हो पाती और हर पेट्रोल पंप पर उनके बंदे बने रहते हैं जो कि चिप को नियंत्रित करते हैं। ऐसी परिस्थितियों से उपभोक्ता लुट रहा है। घटतौली होने से जहां पेट्रोल पंप संचालकों को कुछ हद तक फायदा होता है परंतु उनकी जो साख मार्केट में है वह दागदार हो जाती है।

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