​गर्भपात व नशीली दवाइयों की नगर के मेडिकल स्टोरों में हो रही खुलेआम बिक्री, सम्बंधित विभाग खामोश …

कालपी (जालौन) –जहाँ एक ओर सरकार प्रतिवर्ष भ्रूण हत्या रोकने की कोशिशों में करोङों रुपये खर्च करती है वहीं कालपी के अधिकांश मेडिकल स्टोर मोटे मुनाफे के चक्कर में गर्भपात के लिए इस्तेमाल होने वाली घातक प्रतिबंधित दवाओं की खुलेआम बिक्री कर रहे हैं। भ्रूण हत्या में अहम किरदार निभा रहे मेडिकल स्टोर गर्भपात करने वाली व वियाग्रा जैसी उत्तेजक दवाइयां व नशे व नींद की टेबलेट्स पैसों के लालच में नाबालिग बच्चों तक को धड़ल्ले से बेची जा रही हैं, आपको जानकर हैरानी होगी कि नगर में इन उत्तेजक, नींद की व गर्भपात करने वाली दवाइयों के खरीददारों में नाबालिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जबकि गर्भपात करने वालीं दवाइयां इतनी घातक हैं कि दवा को खाकर किसी की जान पर भी बन सकती है। इन सब मे कालपी के मुनाफाखोर मेडिकल स्टोर्स का अहम योगदान है।
उक्त मेडिकल स्टोर में नशे के रूप में प्रयोग में लाई जाने वाली दवाइयां, इंजेक्शन व सीरप भी नशेड़ियों को बेचे जा रहे हैं, नगर के युवाओं को नशीली दवाइयों का आदी बनाकर ये मेडिकल स्टोर्स  लगभग दोगुने से लेकर चौगने दामों पर नशीली दवाइयां बेचकर मोटी रकम हज़म कर रहे है। घातक नशीली दवाइयां गंभीर बीमारियां फैलाने के साथ युवा पीढ़ी को मौत के मुँह में धकेलने का कार्य कर रहे हैं। मेडिकल स्टोर्स के बदौलत नगर में नशे की लत को पूरा करने के लिए चोरी चकारी जैसे मामलों में प्रतिवर्ष इज़ाफ़ा हो रहा है। नशीली व प्रतिबंधित दवाइयां मेडिकल स्टोर के किसी खास गुप्त स्थान पर रखी जाती हैं ताकि यदि छापेमारी हो तो उसको शीघ्र ही ठिकाने लगाया जा सके।

सूत्रों की मानें तो कालपी के मेडिकल स्टोरों पर बिना डॉक्टरी पर्चे के ही लोगों को पूरा इलाज भी दे दिया जाता है, किन्तु इतना सब होने के बाद भी चिकित्साधिकारियों पर जूं तक नही रेंगती।

अंदर की बात यह है कि फर्जीवाड़े पर यदि नज़र डालें तो मेडिकल स्टोर चलाने हेतु फार्मासिस्टों की डिग्रियां तक अमूमन 20 हज़ार से 30 हज़ार रुपये के सालाना किराए पर लेकर मेडिकल स्टोर का लाइसेंस हासिल कर लिया जाता है, व मेडिकल स्टोर चलाने वाला व्यक्ति ही महिलाओं, बच्चे, बुजुर्ग, जवान से लेकर पशुओं तक का इलाज काउंटर पर तनिक देर में ही कर देता है, गौरतलब है कि मुश्किल ही है जो नगर में किसी भी मेडिकल स्टोर के पास खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग का लाइसेंस तक हो जबकि वेट गेनर व प्रोटीन उत्पादों से लेकर अन्य कई उत्पाद सभी स्टोर में धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं।
(रिपोर्ट – शिवांग शुक्ला)

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