मान्यता प्राइमरी की और शैक्षिक कार्य इण्टर तक,आखिर किसकी सह पर …पढ़े पूरा मामला 

◆ शिक्षा विभाग की मिलीभगत से नगर में न्यू सनराइज इंग्लिश स्कूल के नाम पर चल रहा फ़र्ज़ी इंटर कॉलेज
◆ D.I.O.S. ऑफिस ने इस नाम के किसी भी कॉलेज के पंजीकरण होने की बात को नकारा

(रिपोर्टिंग @शिवांग शुक्ला,कालपी)

कालपी (जालौन) – जहाँ एक ओर योगी सरकार भ्रष्टाचारियों व माफियाओं पर लगाम लगाने की पुरजोर कोशिशों में लगे हुए हैं, वहीं शिक्षा माफियाओं पर मुख्यमंत्री का कोई खौफ नही है, कालपी नगर में शिक्षा के क्षेत्र में आलम यह है कि महज प्राइमरी कक्षाओं की मान्यता लेकर इण्टरकॉलेज तक संचालित किए जा रहे हैं, न्यू सनराइज़ इंग्लिश स्कूल के नाम से नगर में बिजलीघर के पास चलने वाला यह विद्यालय इण्टर तक की शिक्षा प्रदान करता है।
निश्चित तौर पर यह इंटरकॉलेज इस बात का साक्ष्य है कि शिक्षा विभाग के कुछ दीमक शिक्षा को खोखला करने का कार्य निरन्तर करने पर तुले हुए हैं व सत्ता में कौन है उन्हें इस बात से फर्क नही पड़ता क्योकि मुख्यमंत्री जी हर जगह नही पहुँच सकते इस बात से वे बखूबी वाकिफ हैं।
◆ आइए जानते हैं, कि भला कैसे धड़ल्ले से चल रहा है यह फ़र्ज़ी इंटरकॉलेज

बच्चों का दाखिला किसी गांव के सरकारी स्कूल में करवा कर (ताकि परीक्षा केंद्र भी गांव का ही स्कूल बने ताकि नकल करवाई जा सके) 1000 रुपये प्रति छात्र की दर से सालाना एकमुश्त रकम भी जमा कर दी जाती है। फिर शुरू होता है अभिभावकों से लुटाई का खेल, छात्रों से प्रति छात्र अमूमन 400 रुपये की मासिक फीस मतलब 4800 वार्षिक, 1500 रुपये प्रयोगात्मक शुल्क, 1000 रुपये बोर्ड परीक्षा शुल्क, वाहन शुल्क व नकल के लिए 3000 रुपये तक की धनराशि वसूल ली जाती है।

अच्छे अंकों को प्राप्त करवाने का झांसा देकर अभिभावकों से ठगी करके उक्त फ़र्ज़ी विद्यालय छात्रों को नकल से अच्छे अंक हासिल करवाकर छात्रों को पतन के मार्ग पर धकेलकर नगर में अच्छे परिणाम का सितारा बुलन्द करके वाहवाही लूटता है। उक्त फ़र्ज़ी इंटर कॉलेज का संचालन प्रधानाचार्य की कुर्सी पर बैठकर भरत पांडे नामक शिक्षक या कहें कि शिक्षा माफिया बखूबी निडरता पूर्वक कर रहा है, भरत पांडे की मानें तो मान्यता से क्या होता है शिक्षा मान्यता प्राप्त विद्यालय भी देते हैं और हम भी देते हैं, ऊपर इतना पैसा पहुँचा देते हैं कि कोई साल भर कोई झांकने तक नही आता।

सवाल यह उठता है कि ये ऊपर भला है क्या, जिसका जिक्र भरत पांडे सहित कई शिक्षा माफिया कर चुके हैं। आखिर ऊपर यह कौन सा बड़ा भष्टाचारी पांव पसारे हुए है जिसका आदेश और दबदबा मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से भी बढ़कर है।

गुप्त सूत्रों की मानें तो भरत पाण्डेय सरसेला का निवासी होने के कारण भूतपूर्व विधायक प्रतिनिधि से भी अच्छे संबंध रहे हैं जिसके कारण इस फ़र्ज़ी कॉलेज को संचालित करने में तथा विगत वर्षों में शिक्षा के नाम पर किये गए फर्जीवाड़े में किसी तरह की कोई समस्या नही आई है।

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