रामगोपाल यादव की शतरंजी चालों ने समाजवादी पार्टी को ताश के पत्तों की तरह बिखेरा …


शिवपाल के बड़े एलान के बाद शुक्रवार को आखिरकार वही हुआ जिसका अंदेशा राजनीतिक गलियारों में जताया जा रहा था । कई महीनों से चल रही खटपट के बाद समाजवादी परिवार आखिर टूटकर बिखर गया है। पिता-पुत्र, चाचा-ताऊ, भाई-भाई सबके रास्ते अलग होते गए ।


सेक्युलर मोर्चा के नाम से बनने जा रही नई पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव होंगे :

समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद शिवपाल ने ये साफ कर दिया कि नेताजी को सम्मान दिलाने और सामाजिक न्याय के लिए ये मोर्चा बनाया जा रहा है । आगे चल कर इस इस नई पार्टी से सबसे ज्यादा नुकसान सपा को ही पहुंचने वाला है । एक ओर अखिलेश सपा कार्यकर्ता सम्मेलन कर समर्थकों की संख्या बढ़ा रहे हैं दूसरी ओर शिवपाल ने अपनी नई पार्टी से समाजवादियों को एकजुट करने की बात कह कर खलबली मचा दी है ।

शिवपाल कई दिनों से दे रहे थे चेतावनी :

पिछले कुछ दिनों से शिवपाल यादव उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को चेतावनी दे रहे थे कि पार्टी की कमान मुलायम सिंह को दे दें । हाल ही में उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को धमकी दी थी कि अगर पार्टी की कमान मुलायम सिंह यादव को नहीं सौंपी गई तो वह नई पार्टी का गठन कर लेंगे । मुलायम के परिवार में इसे लेकर दो फाड़ है । अपर्णा यादव भी कह चुकी हैं कि मुलायम सिंह को अध्यक्ष पद लौटा दिया जाना चाहिए । उनके परिवार में मुलायम सिंह यादव, दूसरी पत्नी साधना यादव और छोटे बेटे प्रतीक यादव, बहू अपर्णा यादव और शिवपाल एक तरफ हैं जबकि रामगोपाल यादव परिवार के इस विवाद में शुरू से ही मुलायम और शिवपाल के खिलाफ अखिलेश के साथ खड़े हैं । मुलायम को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद हटवाने में भी रामगोपाल यादव का बड़ा रोल था ।

कैसे आईं दरारें …

रामगोपाल यादव की शतरंजी चालों ने सगे चाचा शिवपाल यादव और अखिलेश के बीच बढ़ती तल्खी के बाद से ही पार्टी दो गुटों में बंटती नजर आ रही थी । इस पारिवारिक कलह का नुकसान समाजवादी पार्टी को विधानसभा चुनाव में हुआ , जहां सपा को करारी हार का सामना करते हुए सत्ता से भी हाथ धोना पड़ा । ये कहानी शुरू हुई थी यूपी के विधान सभा चुनाव से कुछ महीने पहले जब रामगोपाल यादव ने अपने घटते कद को महसूस किया और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए दिसंबर 2017 में 325 उम्मीदवारों का एलान किया तो लिस्ट में रामगोपाल यादव के करीबियों का नाम न होने से परिवार में तूफान उठ खड़ा हुआ जबकि शिवपाल के चहेतों की लिस्ट में भरमार थी वही अख‍िलेश के भी बहुत कम करीबियों को जगह मिल पाई । टिकट बंटवारे से नाराज रामगोपाल यादव व सीएम अख‍िलेश ने चाचा श‍िवपाल के दो करीबियों संदीप शुक्ला और सुरभ‍ि शुक्ला से राज्यमंत्री का दर्जा छीन लिया है । संदीप शुक्ला सरकार में बतौर सलाहकार काम कर रहे थे जबकि उनकी पत्नी सुरभ‍ि आवास विकास परिषद की उपाध्यक्ष थीं । सीएम अखिलेश ने टिकट ना पाने वाले विधायकों , मंत्रियों की बैठक बुलाई और ये कह दिया कि सबको टिकट दिया जायेगा । इसके बाद मुलायम-अखिलेश के बीच शिवपाल को लेकर विवाद की खबरें सामने आने लगीं । तत्कालीन पार्टी प्रमुख मुलायम ने कहा था कि सभी उम्मीदवारों को सोच-समझकर चुना गया है , हालांकि जिन उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है उसमें शिवपाल का प्रभुत्व ज्यादा नजर आता है । इसके बाद अखिलेश ने अपने कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी कर दी जिससे सपा में हड़कंप जैसा मच गया । अभी ये तूफान थमा भी नहीं था कि पार्टी सिंबल का मुद्दा गर्मा गया । मामला चुनाव आयोग पहुँचा और मुलायम सिंह यादव की पैतरेबाजी से आखिर साइकिल चुनाव चिन्ह अखिलेश यदाव को मिल गया और उन्होंने खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर कांग्रेस से गठबंधन कर यूपी चुनाव की तैयारी शुरू कर दी । इससे शिवपाल को बड़ा धक्का लगा । तभी से शिवपाल कह रहे थे कि अब नई पार्टी बनाएंगे जिसमें मुलायम भी होंगे ।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s