सरकार की कर्जमाफी बेअसर, कर्जदार किसान की संदिग्ध मौत …

◆ इलाहाबाद बैंक का साढे तीन लाख का कर्जदार था मृतक
◆ डॉक्टरों द्वारा उसे मृत घोषित कर दिये जाने के बाद उसके शव को बापिस ले जाकर खेतों में क्यों डाला गया 


कोंच/जालौन। सूबे की योगी सरकार की कर्जमाफी की योजना का लाभ बुंदेलखंड के किसानों को नहीं मिल सका जिसके चलते कर्जों में फंसे किसान अभी भी या तो आत्महत्यायें कर रहे हैं या फिर वे इतने तनाव में हैं कि हृदयाघात या सदमे में भी उनकी जानें जा रहीं हैं। मंगलवार को ताहरपुरा गांव के एक किसान को खेतों में मृत अवस्था में पाया गया। उसकी मौत की बजह तो हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता लग सकेगी लेकिन बहुत हद तक इस बात का भी अनुमान लगाया जा रहा है कि कर्जमाफी के दायरे में नहीं आने के कारण उक्त किसान अक्सर तनाव में रहता था कि उसका इलाहाबाद बैंक का कर्ज कैसे चुक सकेगा, इसी सदमे में उसकी मौत हो सकती है।
मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार की दोपहर कोतवाली क्षेत्रांतर्गत ग्राम ताहरपुरा और पनयारा के बीच खेतों में एक व्यक्ति का शव पड़े होने की सूचना मिली। मृतक ताहरपुरा गांव का रहने बाला वीरेन्द्रसिंह पुत्र श्यामकरन निरंजन था। मिली जानकारी के अनुसार मृतक पूर्वान्ह 11 बजे अपने खेत में मैंथा की फसल की रखवाली करने के लिये घर से निकला था और लगभग 1 बजे उसके मृत पड़े होने की सूचना गांव में फैल गई। देखते ही देखते वहां ग्रामीणों का हजूम लग गया। कोतवाली पुलिस को भी सूचना भेजी गई जिस पर एसएसआई अजय कुमार सिंह, मंडी चौकी इंचार्ज अरविंद द्विवेदी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मौका-ए-वारदात पर छानबीन करने के बाद शव का पंचायतनामा भर कर पोस्टमार्डम के लिये भेज दिया है। 

बताया गया है कि मृतक बाइस बीघे खेत का मालिक था और उसने इलाहाबाद बैंक से तकरीबन साढे तीन लाख का कर्ज लिया हुआ था। इस बात की भी चर्चा है गांव में कि सरकार द्वारा कर्जमाफी का जो दायरा बनाया गया था उसमें तमाम ऐसे किसान लाभ पाने से वंचित रह गये हैं जिनकी क्षमता कर्ज चुकाने की नहीं रह गई है। ऐसे किसान तनाव में जी रहे हैं और हो सकता है कि वीरेन्द्र भी ऐसे ही किसी सदमे का शिकार हो कर जान गंवा बैठा हो।
◆ मृतक को अस्पताल लाने के बाद फिर खेत में क्यों फेंका गया

कोंच। इस समूचे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चौंकाने बाला तथ्य यह है कि मृतक वीरेन्द्रसिंह की डैड बॉडी पुलिस द्वारा रिकवर किये जाने से पहले उसके परिजनों ने उसे कोंच के सीएचसी में डॉक्टरों को दिखाया था और डॉक्टरों द्वारा उसे मृत घोषित कर दिये जाने के बाद उसके शव को बापिस ले जाकर खेतों में डाला गया। अब यह बात समझ से परे है कि इस सारी कवायद के पीछे का मकसद क्या था। यह विंदु पुलिस की जांच का बिषय हो सकता है ताकि इस मौत के पीछे के कारणों पर कुछ रोशनी पड़ सके।

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