भाजपा के लिए कठिन साबित हो सकता है नगर पालिका का चुनाव बिगड़ सकते हैं समीकरण … 

◆ अतिक्रमण हटाओ अभियान बन सकता है बड़ी वजह

◆ बड़े कब्जाधारियों को प्रशासन ने बक्शा छोटों पर गाज

◆ पूरे अभियान के दौरान भाजपा के जनप्रतिनिधि व नेता भी साधे रहे चुप्पी


(मनोज शर्मा/हेमंत चौरसिया)

नगर पालिका को भले ही भाजपा का गढ माना जाता हो, पर इस सीट पर फिर से विजय पताका लहराना इस बार भी भाजपा के लिए आसान नहीं होगा। वजह साफ है, बीते करीब आधा माह से चल रहे अतिक्रमण अभियान के दौरान व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पडा। उन्होंने अपनी परेशानियों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर भाजपा के जनप्रतिनिधियों व नेताओं तक से संपर्क किया। पर व्यापारियों की एक न सुनी गई। भाजपा के जनप्रतिनिधि व नेता भी पूरे अभियान के दौरान चुप्पी साधे रहे। जिसके चलते छोटे व्यापारी वर्ग में भाजपा नेताओं के प्रति रोष है। इसका असर आगामी निकाय चुनाव में पड सकता है।

गौरतलब हो की उरई नगर पालिका अध्यक्ष की सीट पर अधिकांश समय भारतीय जनता पार्टी का ही कब्जा रहा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय बाबूराम एमकॉम भी अपनी राजनीति के शुरूआती दौर में नगर पालिका के अध्यक्ष रहे। इसके बाद मीना वर्मा, काशी वर्मा आदि भाजपा नेताओं ने भी उरई पालिकाध्यक्ष की कुर्सी संभाली। पिछले निकाय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी गिरजा चौधरी ने सभी प्रत्याशियों को धूल चंटाते हुए भारी मतों से जीत दर्ज की थी। अब निकाय चुनाव की सरगर्मी फिर से शुरू हो गई है और हाल ही में भाजपा ने विधानसभा के चुनाव में भारी भरकम जीत हासिल की है। इसके चलते भाजपा के नेता यह मानकर चल रहे हैं कि उरई पालिकाध्यक्ष की सीट पर फिर से भाजपा का ही कब्जा होगा। पर उनके इस सपने को झटका लग सकता है। कारण यह है कि हाल ही में प्रशासन द्वारा व्यापक पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया है। इस अभियान में सैकडों दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खडा हो गया है। इन पीडित दुकानदारों ने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई। भाजपा के जनप्रतिनिधियों से लेकर नेताओं तक की चौखट पर दस्तक दी। पर निष्कर्ष शून्य ही रहा। 

पूरे अभियान के दौरान भाजपा के जनप्रतिनिधि व नेता चुप्पी साधे रहे और सब कुछ उजडते हुए देखते रहे। भाजपा जनप्रतिनिधियों व नेताओं की इस चुप्पी से शहर के व्यापारी वर्ग में भाजपा नेताओं के प्रति काफी नाराजगी है। गौर करने वाली बात यह भी है कि उरई नगर पालिका में व्यापारी वर्ग का एक बडा वोट बैंक है। अगर यह वोट बैंक भाजपा के हाथ से छिंटका तो भाजपा को उरई पालिकाध्यक्ष की सीट से भी हाथ धोना पड सकता है। इससे पूर्व भी शहर में कई बार अतिक्रमण अभियान चलाया गया। अभियान शुरू होने के साथ ही सत्ता पक्ष के नेता अपनी राजनीति बचाने के चक्कर में प्रशासन पर दबाव बनाकर इसे रुकवा देते थे। पर इस बार ऐसा नहीं हुआ और इसका खामियाजा सैकडों दुकानदारों को भुगतना पडा। आधा माह के इस अभियान में छोटा व्यापारी वर्ग ही निशाने पर रहा |

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