​प्रभु का ध्यान निःस्वार्थ भाव से किया जाए- आचार्य पं. गगन महाराज 


जालौन,खबर आपकी । पूर्व में युगों में जो फल लोगों को हजारों वर्ष की तपस्या व पूजा-अर्चना से प्राप्त होता है, वही फल कलियुग में लोगों को बस जरा से प्रयास में मिल जाता है। परंतु आवश्यकता है कि प्रभु का जो भी ध्यान किया जाए वह निःस्वार्थ भाव से किया जाए। यह बात मोहल्ला बापू साहब में आयोजित साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन सरस कथा वाचक आचार्य पं. गगन महाराज उपस्थित भक्तजनों के समक्ष कही।
नगर के मोहल्ला बापू साहब स्थित डीसेंट कंपटीशन क्लासेस परिसर में आयोजित साप्ताहिक श्रीमद भागवत कथा के अंतिम दिन सरस कथा वाचक आचार्य पं. गगन महाराज ने उपस्थित भक्तजनों को संबोधित करते हुए कहा कि ईश्वर अपने भक्त को बिन मांगे ही सब कुछ दे देता है। जैसे सुदामा को बिन मांगे ही सब कुछ मिल गया। भगवान् अपने भक्त के लिए हमेशा ही तत्पर रहते हैं। सिर्फ उन पर विश्वास करने की जरूरत है। सुदामा जी के दरिद्र होने पर उनकी पत्नी के बार-बार आग्रह करने पर सुदामा अपने बालसखा श्रीकृष्ण से कुछ मांगने की इच्छा लिए उनसे मिलने द्वारिकापुरी जाते हैं। लेकिन श्रीकृष्ण के भव्य महल व राजसी ठाठ-बाट देखकर वह संकोच में पड़ जाते हैं। वह श्रीकृष्ण को अपने आने का उद्देश्य भी नहीं बता पाते हैं। लेकिन भगवान् तो अपने भक्तों के मन तक की बात को भली- भांति जानते हैं। श्रीकृष्ण ने जान लिया कि सुदामा किस उद्देश्य से उनसे मिलने आए हैं। जिस पर उन्होंने सुदामा के कुछ मांगे बिना ही उन्हें सबकुछ दे दिया। जब सुदामा अपने घर पहुंचते हैं, तो वहां की कायाकल्प देखकर पर भौंचक्के रह जाते हैं। इसके उपरांत कथा-शास्त्री द्वारा कलियुग का चरित्र वर्णन किया गया। जिसमें उन्होंने कहा कि कलियुग बीते सतयुग, त्रेता तथा द्वापर तीनों युगों से महान् है। पूर्व में युगों में जो फल लोगों को हजारों वर्ष की तपस्या व पूजा-अर्चना से प्राप्त होता है, वही फल कलियुग में लोगों को बस जरा से प्रयास में मिल जाता है। परंतु आवश्यकता है कि प्रभु का जो भी ध्यान किया जाए वह निःस्वार्थ भाव से किया जाए। कथा श्रवण कर रहे श्रद्धालुओं में भागवत कथा की पारीक्षित श्रीमती जनक किशोरी सक्सेना, चंद्र प्रकाश, मनोरमा, डॉ. सूर्य प्रकाश, अंजली, प्रियांशु, शिखा, रोहित सर, सोनू चौहान, अनिल मित्तल, अतुल द्विवेदी, वाचस्पति मिश्रा, तरूण कुमार, पुनीत कुमार आदि सहित काफी संख्या में उपस्थित भागवत प्रेमी भक्तों ने आस्था के साथ कथा को सुनकर जीवन में अच्छे कर्मों को अपनाने की प्रेरणा ली।

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