​बरकतों का मुकद्दश महीना है रमजान …


जैतपुर ( महोबा ) : रमजान का पाक महीना बरकतों का मुकद्दश महीना कहा जाता है। पवित्र महीना शुक्रवार (जुमा) से शुरू हो गया है। रमजान इस्लामी महीने का नौवां महीना है। इसका नाम भी इस्लामिक कैलेंडर के नौवें महीने से बना है जो इस्लाम के सबसे पाक महीनों में शुमार है। इस महीने को और तीन हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से में दस-दस दिन आते हैं। हर दस दिन के हिस्से को’अशरा’कहते हैं जिसका मतलब अरबी में 10 है। इस तरह इसी महीने में पूरी कुरान नाजिल हुई। रोजा रखना हर मुसलमान के लिए जरूरी बताया गया है।
इस्तखार अली बताते हैं कि इस्लाम में अच्छे इंसान को बखूबी परिभाषित किया गया है। इसके लिए मुसलमान होना ही काफी नहीं, बल्कि बुनियादी पांच कर्तव्यों को अमल में लाना आवश्यक है। पहला कलमा, दूसरा नमाज, तीसरा रोजा, चौथा हज और पांचवां जकात। इस्लाम में बताए गए इन पांच कर्तव्य इस्लाम को मानने वाले इंसान से प्रेम, सहानुभूति, सहायता तथा हमदर्दी की प्रेरणा स्वत: पैदा कर देते हैं। रमजान में रोजे को अरबी में सोम कहते हैं, जिसका मतलब है रुकना। रोजा यानी तमाम बुराइयों से परहेज करना। रोजे में दिन भर भूखा व प्यासा ही रहा जाता है। इसी तरह यदि किसी जगह लोग किसी की बुराई कर रहे हैं तो रोजेदार के लिए ऐसे स्थान पर खड़ा होना मना है। जब मुसलमान रोजा रखता है, उसके हृदय में भूखे व्यक्ति के लिए हमदर्दी पैदा होती है। रमजान में पुण्य के कामों का शबाब सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है। जकात इसी महीने में अदा की जाती है।
गलत कामों से बचने की नसीहत देता रोजा फईम खां कहते हैं कि रोजा झूठ,हिंसा बुराई, रिश्वत तथा अन्य तमाम गलत कामों से बचने की प्रेरणा देता है। इसका अभ्यास यानी पूरे एक महीना कराया जाता है ताकि इंसान पूरे साल तमाम बुराइयों से बचे। कुरान में अल्लाह ने फरमाया कि रोजा तुम्हारे ऊपर इसलिए फर्ज किया है, ताकि तुम खुदा से डरने वाले बनो और खुदा से डरने का मतलब यह है कि इंसान अपने अंदर विनम्रता तथा कोमलता पैदा करे। बाजारों में बढ़ी रौनक, जमकर हुई खरीदारी बजारों में सेहरी और अफ्तार की सामग्रियां दिखाई देने लगी हैं। सेहरी और रोजा अफ्तार के लिए कुछ अलग व्यंजन मौजूद हैं। इन सामग्रियों से बाजार सज गए हैं। लोग दूध फैनी के साथ सेहरी कर रोजे की शुरुआत करते हैं, वहीं नुक्ती खारे को अपनी अफ्तार के व्यंजनों में शामिल रखते हैं। अफ्तार के लिए  (पवित्र) मानी जाने वाली खजूर की कई प्रजाति बाजार में है। इसके अलावा मौसमी फलों की बिक्री भी बढ़ गई है।

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