देशव्यापी बन्दी ! आज बन्द रहेंगे ज़्यादातर मेडिकल स्टोर बन्द,हो सकते हैं दवाइयों के ग्राहक परेशान … 

◆ मंगलवार 30 मई को पूरे जिले में दिखेगा मेडिकल स्टोर्स की बन्दी का असर, जानिये आखिर क्यों हो रही है देशव्यापी बन्दी।


◆ फार्मेसिस्ट की मौजूदगी वाले मेडिकल खुले रहेंगे
उरई (जालौन) – आज 30 मई दिन मंगलवार को दवा विक्रेताओं का संगठन आल इंडिया स्ट्राइक पर जा रहा है ! देश के हर नागरिक को यह जानना चाहिए कि आखिर मरीज़ों कि जान को खतरे में डाल कर अपना स्वार्थ देखने वाले ज्यादातर दवा दुकानदारों द्वारा हड़ताल क्यों की जा रही है? दरअसल अपनी दुकान को बंद कर हड़ताल पर जा रहे केमिस्ट सरकार के डिज़िटल इंडिया के साथ फार्मा क्षेत्र से भ्रष्टाचार हटाने , दवा की कीमतों पर लगाम लगाने जैसे कई जनहित के मुद्दों के खिलाफ गोलबन्दी कर सरकार पर दबाव डालने की फिराक में हैं l यदि सरकार हर दवा और उपभोक्ता का रिकॉर्ड रखने के लिए दवा निर्माण से लेकर मरीज़ तक का डाटा ऑनलाइन करने की रणनीति पर कार्य कर रही है तो इसमें दिक्कत क्या है ? जैसा कि कई बार वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (डब्लूएचओ) ने भारत में एंटीबीओटिक्स के दुरूपयोग और इससे होने वाले खतरे को लेकर चिंता जता चुके हैंl भारत में अब तक दवा के रख रखाव व लाइसेंसिंग का रिकॉर्ड मैनुअली होता था। बिहार यूपी झारखण्ड व नार्थ एस्ट जैसे राज्यों में तो बगैर लाइसेंस हज़ारों दुकानें चलाई जा रही हैl केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के औषधी नियंत्रण विभाग को ऑनलाइन करने को कहा, ताकि हर दवा निर्माण से लेकर मरीज़ तक  का रिकॉर्ड रखा जा सके। कई बार कई मरीज़ खुद ही मेडिकल स्टोर वाले जो महज़ आठवीं दसवीं पास या फेल है उनके कहने मात्र से एंटीबीओटिक्स खा लेते हैl जिसका खामियाजा बाद में मरीज़ भुगतता है। यही एंटीबीओटिक्स आगे जाकर शरीर को काफी नुकसान पहुँचती है एक शोध के अनुसार वर्ष 2050 में सिर्फ भारत में हर साल पांच लाख लोगों की मौत सिर्फ एंटीबीओटिक्स से ही होने वाली है। हाल में ही जी न्यूज़ चैनल ने एंटीबीओटिक्स के बेअसर होने की बड़ी खबर भी चलाई थीl
आज दवा दुकानदारों का संगठन दवा दुकानों की ऑनलाइन व्यवस्था के खिलाफ सिर्फ इसलिए हड़ताल कर रहा है ताकि इनकी मनमानी चलती रहे ! इसके अलावा एक दूसरा पहलु भी है की देश में 50 फीसदी से भी ज्यादा दवा कारोबार बगैर बिल के होता है।  जनता तो एमआरपी पर दवा के बिल का भुगतान करना होता है ! पर दवा कारोबारी काफी कम कीमत में दवा खरीदते हैं। सरकार दवाइयों की कीमतों में कमी  लाना चाहती है वहीँ दवा कारोबारी अपनी मनमानी पर किसी तरह का अंकुश नहीं चाहते, दवा कारोबारी टैक्स के रुपए बचाने के चलते बिल नहीं देते। ऑनलाइन होने से दवा कारोबारियों को दवा रिकॉर्ड रखने के साथ टैक्स भी देना देना पड़ेगा। टैक्स बचाने के चक्कर में दवा कारोबारी हड़ताल कर सरकार को घेरना चाहते है !

केमिस्ट संगठनों की बंदी के खिलाफ देश के फार्मासिस्ट संगठन ने अपनी फार्मेसी खोलने का फैसला लिया है ! यहाँ यह जानना भी जरुरी है कि फार्मासिस्ट वह पेशेवर है जो दवा के इफ़ेक्ट साइड इफेक्ट इत्यादि के बारे में भली भाँति जानता है ! इसके लिए उसे दो वर्ष / चार वर्ष का पाठ्यक्रम करना होता है फिर दवा की कंपनियों व अस्पतालों में ट्रेनिंग दी जाती है ! पहले केवल खुदरा (रिटेल) में ही फार्मासिस्ट को अप्पोइंट किया जाता था पर दवा के खतरे को देखते हुवे सरकार ने होलसेल तथा दवा की कंपनियों में पेशेवर फार्मासिस्ट की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दे दिया। सरकार के इस फैसले से पहले जो आठवीं दसवीं फेल यहाँ तक कोई भी अनपढ़ आदमी दवा बांटता था इस सरकारी फैसले से तिलमिलाए हुवे हैं।

ऐसे में देखना यह होगा कि इस देश की 125 करोड़ जनता सरकार के फैसले के खिलाफ जाने वाले इन दवा कारोबारियों को किस हद तक बायकॉट करेंगे या फिर सरकार को ही इन दवा केमिस्टों के खिलाफ झुकना पड़ेगा। अब यहाँ पर सवाल उठता है कि बंदी में शरीक किसी भी केमिस्ट की दुकान से क्या कभी दवा नहीं खरीदीे जाएगी।आज दिनांक 30 मई प्रस्तावित हड़ताल के दिन रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट द्वारा संचालित दुकानों में आम दिनों की अपेक्षा ज्यादा ही भीड़ रहने की उम्मीद है।

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