​प्रांतीय खंड के अतिरिक्त प्रभार के दौरान एक्सईएन ओझा ने चहेते ठेकेदारों पर की धनवर्षा …

◆ महिला ठेकेदार को थमाये 13 सप्लाई आर्डर
◆ बगैर सप्लाई किये छह सप्लाई आर्डर के 60 लाख का किया भुगतान

◆ बगैर बनी सड़क पर अतिरिक्त आइटम दर्शाकर ज्यादा रेटों पर किया लाखों का भुगतान

उरई (जालौन) : प्रांतीय खंड का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद अधिशासी अभियंता एसपी ओझा ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने चहेते ठेकेदारों को दोनों आंखों से धनवर्षा करने में कोई कोताही नहीं दिखायी। इतना ही नहीं एक ठेकेदार को तो उन्होंने नियमों को दरकिनार कर 13 सप्लाई आर्डर के आदेश थमा दिये जिनकी सप्लाई भी नहीं हुयी ओर संबंधित ठेकेदार को उसका भुगतान भी कर दिया। हैरत की बात तो यह है उन्होंने एक संपर्क मार्ग जो बना ही नहीं उसका भुगतान कर दिया और उसी बगैर बनी सड़क पर अतिरिक्त आइटम का भुगतान भी ज्यादा रेटों पर कर भ्रष्टाचार की अंतिम सीढ़ी को भी लांघ चुके हैं।

गौरतलब हो कि पीडब्ल्यूडी-3 के अधिशासी अभियंता एसपी ओझा जो विधानसभा चुनाव के दौरान जैसे ही प्रांतीय खंड का अतिरिक्त कार्यभार मिला तो उन्होंने अपने चहेते ठेकेदारों को उपकृत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इसीक्रम में उन्होंने महिला ठेकेदार शालिनी दीक्षित को स्टोर सामग्री की आपूर्ति के 6 सप्लाई आर्डर जो दस-दस रुपये के बताये जा रहे दे दिये। यदि विभागीय सूत्रों की मानें तो ठेकेदार शालिनी दीक्षित ने एक भी सप्लाई आर्डर पर किसी भी प्रकार की न तो कोई सप्लाई दी इसके बाद भी लगभग 60 लाख रुपये का भुगतान एक्सईएन ओझा ने करवा दिया। इसके अलावा भी उन्होंने 7 अन्य सप्लाई आर्डर सप्लाई एवं फिक्सिंग के महिला ठेकेदार के नाम पर थमा दिये। ताज्जुब की बात तो देखिये उन्होंने प्रांतीय खंड के प्रभारी एक्सईएन रहते महिला ठेकेदार के नाम से जितने भी सप्लाई आर्डर थमाये थे उनका भुगतान भी करने में कोई कंजूसी नहीं दिखाई। अब जबकि प्रांतीय खंड में पीएन श्रीवास्तव अधिशासी अभियंता बनकर आ गये हैं तो ऐसे में एक्सईएन ओझा के कार्यकाल में हुये भ्रष्टाचार की परतें खुलनी शुरू हो गयी है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एसपी ओझा ने महिला ठेकेदार के नाम से जितने भी सप्लाई आर्डर जारी किये थे उसमें वह स्वयं ही फिफ्टी-फिफ्टी के हिस्सेदार थे। लिहाजा जिन ठेकेदारों को काम नहीं मिल पाया था उन्होंने भी काम मिलने की लालसा में उस दौरान अपना मुंह नहीं खोला और इसी दौरान एसपी ओझा का प्रांतीय खंड से अतिरिक्त प्रभार छिन गया और उनके स्थान पर पीएन श्रीवास्तव प्रांतीय खंड में अधिशासी अभियंता बनकर आ गये। एसपी ओझा के भ्रष्ट कारनामों की श्रृंखला यहीं तक रहती तो गनीमत थी बल्कि उससे चार कदम आगे चलकर उन्होंने महिला ठेकेदार शालिनी दीक्षित के नाम से एक संपर्क मार्ग जिसका निर्माण ही नहीं हुआ था उसका भी भुगतान कर दिया। इसके अलावा भी बगैर बनी सड़क पर अतिरिक्त आइटम दर्शाकर दूसरी सड़क के बजट से ज्यादा रेटों में भुगतान किये जाने का मामला खुलकर सामने आया है। जैसे ही अपने भ्रष्ट कारनामों की परतें खुलने की जानकारी लोनिवि-3 के अधिशासी अभियंता एसपी ओझा को पता चली तो उन्होंने अपने ही विभाग के कुछ विश्वसनीय ठेकेदारों व कर्मचारियों को इस काम में जुटा दिया है कि वह हर संभव प्रयास करें कि उनके कार्यकाल के दौरान प्रांतीय खंड में जो कुछ भी गोलमाल हुये ऐसे मामलों को किसी भी तरह से वहीं पर दफन कर दिये जायें।

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