प्रभारी आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी व्यवस्थाओं को बिगाड़ने में लगे …

◆ शोपीस साबित हो रहे जनपद के 41 आयुर्वेदिक चिकित्सालय

◆ साल में करोड़ों रुपये होता वेतन के नाम पर खर्च

◆ चिकित्सक, फार्मासिस्ट रहते गायब, स्वीपर बांटते दवा

उरई (जालौन)। जनपद में संचालित 41 आयुर्वेदिक चिकित्सालय पूरी तरह से शोपीस साबित हो रहे हैं। जहां अधिकतर चिकित्सालयों में तैनात चिकित्सक व फार्मासिस्ट ड्यूटी से गायब रहते तो वहां आने वाले मरीजों को स्वीपर दवायें वितरित कर उन्हें स्वास्थ्य लाभ पहुंचा रहे हैं। ऐसे अस्पतालों के संचालन में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये तो केवल कर्मियों के वेतन के नाम पर खर्च हो रहे जबकि दवा वितरण के नाम पर भी करोड़ों रुपये शासन द्वारा बजट आवंटित किया जा रहा है। ताज्जुब की बात तो यह है कि प्रभारी आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी डा. मुरलीधर आर्या व्यवस्थाओं को बनाने में नहीं बल्कि बिगाड़ने में अपनी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं।

 एक ओर जहां प्रदेश सरकार जनपद ही नहीं बल्कि समूचे प्रदेश में आयुर्वेदिक अस्पतालों का संचालन कर प्रति वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर जनता को स्वास्थ्य सेवायें मुहैया कराने में जुटा हुआ है। लेकिन जनपद जालौन के 41 अयुर्वेदिक चिकित्सालयों में से ज्यादातर शोपीस साबित हो रहे हंैं। बताया जाता है कि आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में तैनात चिकित्सक व फार्मासिस्ट महीने में कितने दिन ड्यूटी पर उपस्थित रहते हैं उसकी सच्चाई कार्यवाहक क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी डा. मुरलीधर आर्या अच्छी तरह से जानते व समझते हैं क्योंकि वह स्वयं भी डकोर विकासखंड के ग्राम बम्हौरी के आयुर्वेदिक चिकित्सालय में चिकित्साधिकारी पद पर तैनात है। वह इससे पूर्व कितने दिन अपनी सेवायें देने बम्हौरी पहुंचते हैं इसकी सच्चाई तो स्वयं गांव के ग्रामीणों से की जा सकती है। जिले में संचालित आयुर्वेदिक अस्पतालों में उरई नगर में दो, जालौन नगर मे एक, कालपी में एक, ग्राम चांदनी, छौंक, अमीटा, कुइया, इटौरा, हरदोई गूजर, इटौरा, सिमिरिया, एट, अंडा, रूरा अड्डू, सैदनगर, अंडा, कोंच, धंतौली, कोटरा, कदौरा सहित कुल मिलाकर 41 की संख्या में हैं। लेकिन ज्यादातर आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में कई सालों से पदस्थ चिकित्सक व फार्मासिस्ट अपनी सेवायें स्थानीय लोगों को न देकर अपने मूल स्थानों पर प्राइवेट प्रैक्टिस कर धनअर्जन करने में लगे हुये हैं। ऐसे में जिन आयुर्वेदिक अस्पतालों में उनकी तैनाती है वहां के लोगों को कैसे स्वास्थ्य सेवायें मुहैया हो रही है यह एक ऐसा सवाल है जिसका जबाब कार्यवाहक क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी डीके आर्या के पास भी नहीं होगा। ऐसा भी नहीं कि उन्हें जनपद के आयुर्वेदिक चिकित्सालयों की जमीनी हकीकत की जानकारी न हो लेकिन वह भी ‘‘हम भी खायें, तुम भी खाओ’’ के फार्मूले को अपनाकर जिले के ज्यादातर आयुर्वेदिक अस्पतालों में महज रजिस्टर में फर्जी तरीके से मरीजों के दर्ज कर उन्हें ही स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करते देखे जा रहे हैं।

इनसेट–

आयुर्वेदिक अस्पतालों की हकीकत से सीएम को करायेंगे अवगत : पालीवाल

उरई। भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष उदयन पालीवाल से जब जनपद के कागजों में संचालित 41 आयुर्वेदिक अस्पतालों के बारे में सवाल किया तो उनका कहना था कि वह जल्द ही ऐसे चिकित्सालयों के बारे में पूरी जानकारी जुटाकर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ से मिलकर मामले से अवगत करायेंगे ताकि प्रदेश सरकार द्वारा जनता के हित में संचालित आयुर्वेदिक अस्पतालों में तैनात चिकित्सक नियमित रूप से अपने तैनाती स्थल पर प्रतिदिन उपस्थित होकर मरीजों को स्वास्थ्य लाभ करायें यही शासन की मंशा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो भी चिकित्सक अपने तैनाती स्थल से अनुपस्थित रहेगा उनके खिलाफ निलंबन तक की कार्यवाही करायी जायेगी लेकिन इस तरह से किसी भी चिकित्सक को जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलबाड़ करने की इजाजत कतई नहीं दी जायेगी।

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