इप्टा की 17वीं बाल एवं युवा रंगकर्मी नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला 2017 का प्रस्तुतिकरण एवं सम्मान समारोह …

(कोंच ब्यूरो : पी.डी.रिछारिया)

कोंच/जालौन : आज का समाज अपनी संस्कृति से दूर हो रहा है, अपने लोक से दूर हो रहा है। लोक से कटकर इंसान मशीन हो जाता है। भोगवादी प्रवृत्ति और धनसंग्रह के कारण आज समाज में अनेकों विकृतियां फैल रही है। सामाजिक कुरीतियों को केन्द्रित कर बाल रंगकर्मियों द्वारा अपने नाटकों का जो प्रस्तुतिकरण किया गया है, वह सराहनीय है। रंगकर्म समाज के कुहासा को दूर करने का काम करता है। जब तक समाज में साहित्य और कलायें जिन्दा है, उनको प्रश्रय दिया जायेगा, तब तक समाज में संवेदनायें जिन्दा रहेगी। उपरोक्त विचार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश शासन के राज्यमंत्री व उत्तर प्रदेश बौद्ध आयोग के उपाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा ने व्यक्त किये। 

‘स्व. टीडी वैद स्मृति रंगमंच स्थल'( अमर चन्द्र महेश्वरी इण्टर कॉलेज कोंच) में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) कोंच इकाई द्वारा इप्टा कोंच के संस्थापक संरक्षक कामरेड टीडी वैद की स्मृति में आयोजित ’17वीं ग्रीष्मकालीन नि:शुल्क बाल एवं युवा रंगकर्मी नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला’ के प्रस्तुतिकरण एवं सम्मान समारोह के अवसर पर लोक संस्कृति मर्मज्ञ कुशवाहा ने कहा कि बुंदेली लोक संस्कृति में नैतिकता, सदाचार, मानवीयता, स्त्री सम्मान आदि की भरमार है। बुंदेलखंड का प्रत्येक त्योहार लोगों को मानवीय मूल्यों की सीख देता है। उन्होंने बुंदेली संस्कृति के गीतों का उद्धरण देते हुये आम जनमानस का मन मोह लिया। उन्होंने रंगकर्मियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि आज के छोटे बच्चे जब भविष्य के नागरिक बनेंगें तो वे इप्टा द्वारा सीखे गऐ मानवीय मूल्यों के माध्यम से एक बेहतर समाज बनाने की प्रक्रिया में अपनी भूमिकाओं का निर्वहन करेंगें। 

बतौर मुख्य वक्ता प्रख्यात फिल्म अभिनेता व टीवी कलाकार आरिफ शहडोली ने कहा कि इप्टा कोंच के रंगकर्मियों के स्वाभाविक अभिनय ने व्यवसायिक अभिनेताओं को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि इप्टा के शिविरों के माध्यम से बच्चों की प्रतिभा प्रदर्शित होती है और उनमें आत्मविश्वास बढता है। उन्होंने अभिभावकों का आव्हान किया कि वे अपने बच्चों की प्रतिभाओं का दमन न करें, बच्चे जो बनना चाहते हैं, उन्हें उनकी क्षमताओं के हिसाब से वैसा बनने के लिए प्रेरित करें व उनकी प्रगति में सहायक हों। शहडोली ने कहा कि बुंदेलखंड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, मगर उन्हें परिवार व समाज के स्तर पर प्रोत्साहन नहीं मिलता है जिसके चलते वे गुमनामी के अंधेरे में खो जाती है। समारोह को इप्टा की राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य डॉ. सतीशचन्द्र शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार व यूपी इलेक्शन वॉच के संयोजक अनिल शर्मा, कार्यक्रम अध्यक्ष इप्टा कोंच के संरक्षक अनिल वैद ऐडवोकेट, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि देवेन्द्र सिंह निरंजन, उरई इप्टा के महासचिव राज पप्पन, जल-जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी कोंच नवीनकुमार नायक, सरनाम सिंह यादव आदि ने भी संबोधित किया। इससे पूर्व अनिल वैद, सौरभ मिश्रा, राशिद अली, भास्कर गुप्ता, रामकिशोर कुशवाहा, संस्कृति गिरवासिया, पारसमणि अग्रवाल, ऋचा गर्ग, सत्यपाल सिंह, संजय सतोइया, सागर व्यास, नीरज सेन, ट्विंकल राठौर, पुष्पेन्द्र सिंह, श्लोक दुबे, अमन सोनी, इकरा, शम्भू पटेल, राजेश राठौर, ईसा, कोमल अहिरवार, रानी, शाहना, समीक्षा झां, तययबा, मानसी, वरदान गुप्ता, आदर्श अहिरवार आदि द्वारा अतिथियों का बैच अलंकरण किया गया। प्रांतीय सचिव व इप्टा कोंच के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद नईम द्वारा कोंच में इप्टा की स्थापना व प्रगति में संस्थापक संरक्षक कामरेड टीडी वैद के योगदान पर प्रकाश डालते हुए समस्त अतिथियों का परिचय कराया। कार्यक्रम का समापन गीत ‘आजादी ही आजादी’ के गायन द्वारा किया गया। संचालन इप्टा कोंच के संस्थापक अध्यक्ष व प्रान्तीय सचिव डॉ. मोहम्मद नईम ने किया। सहयोग सौरभ मिश्रा व पारसमणि अग्रवाल ने किया। इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के शासकीय अधिवक्ता वीरेन्द्र प्रताप सिंह, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता राम तिवारी, पूर्व बार संघ अध्यक्ष सन्तलाल अग्रवाल, विनोद अग्निहोत्री, प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रियाशरण नगाइच, डॉ. हरिमोहन गुप्ता, नरेन्द्र मोहन मित्र, कढोरे लाल यादव,  शाहिद अजनबी, राधेकृष्ण श्रीवास्तव, आशुतोष हूंका, मुईनउद्दीन अजमेरी, श्रीकान्त गुप्ता, वीरेन्द्र त्रिपाठी, अतुल शर्मा, क्षेत्रीय सांसद प्रतिनिधि अनिरुद्ध मिश्रा, रामशरण कुशवाहा, आदित्य वैद, धर्मेन्द्र गोस्वामी, उरई इप्टा के डॉ. धर्मेन्द्र वर्मा, संजीव गुप्ता, अमजद आलम, राम गुप्ता, दीपेन्द्र कुमार, धनीराम सहित सैंकडों की संख्या में दर्शक, अभिभावक व नाट्य प्रेमी उपस्थित थे। 

 

कई लोग नवाजे गये विभिन्न सम्मानों से –

नाट्य कार्यशाला 2017 के समापन अवसर पर इप्टा कोंच द्वारा नाट्य लेखन, नाट्य निर्देशन, रंगकर्म और समाजसेवा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से घोषित सम्मान अलंकरण समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें इप्टा कोंच के संरक्षक कॉमरेड टीडी वैद स्मृति जनसंस्कृति सम्मान डा. सतीशचन्द्र शर्मा को, इप्टा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव प्रो. जितेन्द्र रघुवंशी स्मृति नाट्य लेखन सम्मान रंगकर्मी राज पप्पन को, अभिनेता जुगलकिशोर स्मृति नाट्य निर्देशक सम्मान नीरज सेन व सत्यपाल सिंह को, सुर सामाग्री डॉ. वीणा श्रीवास्तव स्मृति संगीत सम्मान शंभू पटेल को, श्रीमती शांति देवी जैन स्मृति समाजसेवी सम्मान जल-जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह को, कु. मिताली दुवे स्मृति रंगकर्मी सम्मान मिर्जा शफकत बेग (ईसा) को तथा जीतआनंद ‘जीत’ कुशवाहा स्मृति रंगकर्मी सम्मान राजेश राठौर (अंकुर) को अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया। 
रंगकर्मियों के प्रोत्साहन हेतु इप्टा कोंच के संरक्षक अनिल वैद ऐडवोकेट ने अपने पिता कामरेड टीडी वैद की स्मृति में कामरेड टीडी वैद स्मृति श्रेष्ठ रंगकर्मी सम्मान व एक-एक हजार रुपये का पुरस्कार रंगकर्मी कोमल अहिरवार, शाहना खान, राज शर्मा, कन्हैया लाक्षकार, समीक्षा झा व रानी कुशवाहा को प्रदान किये गये। इस अवसर पर समस्त रंगकर्मियों व कार्यशाला प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र व स्मृति चिन्ह समस्त अतिथियों द्वारा प्रदान किये गये। अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किये गये। जबकि प्रशिक्षकों नीरज सेन को वंशिका, सत्यपाल सिंह को पलक सोनी, संजय सतोइया को पूर्वी, संस्कृति गिरवासिया को शैलजा, सागर व्यास को प्रगति, पुष्पेन्द्र सिंह को राजू यादव, श्लोक दुवे को राज शर्मा, शंभू पटेल को कन्हैया लाक्ष्कार, गोविंदप्रसाद को अमन अग्रवाल, मंगलदास को शिवानी सोनी, ऋचा गर्ग को मुस्कान, नन्द कुमार (नंदू) को इशरत द्वारा स्मृति चिन्ह व सम्मान पत्र भेंट किये गये।

 

इन रंगकर्मियों ने बिखेरा जलवा

कार्यशाला प्रस्तुति समारोह में इप्टा गीत के बाद स्वागत गीत, ‘सुनी जो उनके आने की आहट गरीबखाना सजाया हमने’ रंगकर्मियों शाहना खान, रानी, कोमल, ईसा, तैयबा ने,  स्व. टीडी वैद जी को श्रद्धांजलि गीत ‘चिट्ठी न कोई संदेश, न जाने कौन से देश, कहां तुम चले गये’ अमन सोनी द्वारा, गीत ‘हर तरफ, हर जगह, हर कहीं पे है, हां उसी का नूर’, शाहना खान, रानी, कोमल, ईसा, तययबा द्वारा, नाटक राम राम हरि बोल में रंगकर्मियों प्रमथ बाजपेई, अमन खान, दानिश, वैष्णवी, सौम्या, अश्विनी, अमन कुशवाहा, पीयूष राठौर, हनी, स्नेहा उदैनिया, शिवानी, कैफ, रणवीर सिंह, प्रखर, ऋतिक, आर्यन, नैतिक, कंदर्प, हर्षित, यशी, खुशी, मुईन, माही आदि द्वारा साम्प्रदायिक की समस्या को उठाते हुए कौमी एकता का संदेश दिया। जनगीत, ‘हम मेहनत करने वाले सब एक हैं’ रंगकर्मियों  शिवानी, इशरत, ऋतिका, मानसी, आदर्श, राज, इकरा, समीक्षा, वंशिका, प्रगति, मुस्कान, काजल द्वारा प्रस्तुत किया गया, जबकि नाटक ‘चोरों का राज’ में रंगकर्मियों ईसा, तैयबा, राजेश राठौर, अमन कुशवाहा, कन्हैया लाक्ष्कार, अमनसोनी, निश्चय अग्रवाल, कुमकुम, शिप्रा द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंनें समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार की समस्या पर करारा व्यंग्य किया। जन गीत ‘बोल मेरे रामा, बता मोरे अल्ला, कहां गया नमक तेल, कहां गया गल्ला’ रंगकर्मियों इशरत, ऋतिका, मानसी, इकरा, समीक्षा, वंशिका, पलक, शाजमीन, शैलजा, प्रगति, मुस्कान, काजल द्वारा प्रस्तुत किया गया। नाटक ‘कहां सुरक्षित हैं हम’ रंगकर्मी आदर्श, ईसा, शैलजा, वंशिका, पलक सोनी, शाजमीन, स्नेहा, पूर्वी द्वारा बलात्कार जैसे मुद्दे पर आम जनमानस को सोचने पर विवश कर दिया। गीत ‘या मौला तेरी क्या बात है’ रंगकर्मी रानी, कोमल, ईसा, शाहना, तययबा द्वारा प्रस्तुत किया गया। नाटक ‘जुलूस’ रंगकर्मी राज शर्मा, अमन अग्रवाल, शिवम, वरदान गुप्ता, कन्हैया लाक्षकार, रूपाली, कार्तिकेय, विमल वर्मा, दिव्या, सुमित, इशरत, ऋतिका, मानसी, इकरा, प्रगति, मुस्कान, काजल, राघव कुशवाहा द्वारा मंचन कर दर्शकों को तालियां बजाने पर विवश कर दिया। नाटक ‘किस्सा अजनबी लाश का’ रंगकर्मी विष्णु राय, शाहना खान, समीक्षा झा, रानी, कोमल, राजू यादव, ट्विंकल राठौर, राजेश राठौर, प्रमथ बाजपेई, कन्हैया लाक्षकार, अमन अग्रवाल, वरदान गुप्ता, शिवम् द्वारा किया गया। आभार अनिल वैद द्वारा व्यक्त किया गया।

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