नियमों का ताक पर रख बिना टेंडर के खरीद लीं तीन लाख से अधिक की दवाएं …

★लखनऊ के अधिवक्ता ने जिले के डीएम व उच्च अधिकारियों से की शिकायत 

★दवा खरीद में गंभीर अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग 

★जिलाधिकारी को भी अंधेरे में रखने से नहीं चूके क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी 

रिपोर्ट : हेमन्त चौरसिया 

उरई/जालौन। जिले के आयुर्वेदिक व यूनानी अस्पतालों में मरीजों की सेहत के साथ किस तरह खिलवाड किया जा रहा है इसकी बानगी दिनों दिन देखने को मिल रही है। ऐसा ही एक मामला और प्रकाश में आया है। जिसमें जो दवाएं टेंडर से खरीदी जानी थीं उन्हें कुटेशन के आधार पर खरीद लिया गया। इसके अलावा दवाओं की गुणवत्ता भी ठीक नहंी है। इतना ही नहीं, दवाओं की खरीद में क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी ने तत्कालीन जिलाधिकारी तक को गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोडी। अब लखनऊ के एक अधिवक्ता ने मामला संज्ञान में आने पर इसकी शिकायत जिले के डीएम व उच्च अधिकारियों से करते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। 

गौरतलब है कि जिले के आयुर्वेदिक व यूनानी विभाग में बडे स्तर पर धांधली चल रही है। दवाओं की गुणवत्ता को लेकर पहले से ही प्रश्नचिन्ह खडे हो रहे थे। इसे लेकर एक जांच दल बीते दिनों जिले में जांच करने के लिए भी आ चुका है। पर दवाओं की खरीद के इस मामले में लगातार धांधलियां उजागर हो रही हैं। अब एक नया मामला दवा खरीद में हुई अनियमितताओं का सामने आया है। लखनउ के हजरतगंज निवासी अधिवक्ता श्याम नारायण सिंह ने जिले के डीएम समेत झांसी मंडल के आयुक्त, आयुर्वेदिक सेवाओं के डायरेक्टर, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं आयुष विभाग, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने बताया कि निदेशक आयुर्वेदिक सेवाएं उत्तर प्रदेश द्वारा जिले में दवाओं की खरीद के लिए 326000 रुपए आवंटित किए गए थे। नियमानुसार एक लाख या इससे अधिक की दवाओं की खरीद टेंडर के माध्यम से होनी चाहिए। जनपद जालौन के प्रभारी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी द्वारा दवाओं की खरीद में भारी धांधली की गई। सभी नियम कायदों को ताक पर रखकर उक्त अधिकारी द्वारा 326000 रुपए की दवाएं टेंडर के बजाए कुटेशन के आधार पर खरीद ली गईं। इन दवाओं की खरीद में तत्कालीन जिलाधिकारी तक को अंधेरे में रखा गया। उन्होंने कहा कि कुटेशन के आधार पर जो दवाएं खरीदी गईं हैं उनकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं हैं। शिकायतकर्ता अधिवक्ता ने मांग की है कि दवाओं की खरीद में प्रभारी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक  व यूनानी अधिकारी द्वारा की गई गंभीर अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। ताकि सरकारी धन का बंदरबंाट करने वालेां के खिलाफ कार्रवाई हो सके और अस्पताल आने वाले मरीजों को गुणवत्ता युक्त दवाएं मिल सकें। 

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