“निश्छल भक्ति के प्रतीक हैं सुदामा”- गोपाल शरण

◆ द्वारिकाधीश ने किया रुक्मिणी का हरण, रचाया विवाह

कोंच/जालौन,पी.डी.रिछारिया। जगद्गुरु स्वामी शुकाचार्य जी महाराज की तप:स्थली ग्राम सुरावली में ‘सुरावली पीठ’ के कृपा पात्र बाल व्यास गोपाल शरण जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के अंतिम दिवस कथा में भगवान द्वारिकाधीश के विवाहों की आनंददायी कथायें सुना कर श्रोता समुदाय को आनंदित किया। सुदामा चरित्र की कथा में उन्होंने श्रोताओं को इतना भावुक कर दिया कि उनकी आंखें भीग गईं। उन्होंने सुदामा को निश्छल भक्ति का प्रतीक बताया जो बिना किसी कामना के परमात्मा का स्मरण करते रहते हैं और अपनी विपन्नता में भी प्रसन्न हैं।

हर बर्ष की भांति इस बर्ष भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर संयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दौरान आज अंतिम दिवस की कथा में कथा प्रवक्ता ने भगवान द्वारिकाधीश भगवान कृष्ण के विवाहों की बड़ी ही रोचक और आनंददायी कथायें सुना कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने रुक्मिणी-कृष्ण की कथा काफी विस्तार से सुनाते हुये कहा कि रुक्मिणी का विवाह उनकी इच्छा के विपरीत होने बाला था लेकिन मन ही मन वे द्वारिकाधीश को अपना पति मान चुकी थीं। विवाह की तैयारियों के बीच उन्होंने द्वारिकाधीश को अपने मन का संकल्प बताते हुये संदेश भेजा और द्वारिकाधीश ने उनका हरण कर उनके साथ विवाह किया। भगवान द्वारिकाधीश ने सत्यभामा, कालिंद्री, जाम्बबंती आदि से भी विवाह रचाये, इस प्रकार उन्होंने सोलह हजार एक सौ आठ विवाह किये। उन्होंने सुदामा चरित्र का मार्मिक चित्रण कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान द्वारिकाधीश और सुदामा की मित्रता हमें निश्छल मैत्री संबंधों के साथ आदर्श मित्रधर्म की भी शिक्षा देती है। कथा समापन के बाद परीक्षित मालती दीक्षित व विजय दीक्षित ने भागवत जी का पूजन कर आरती उतारी। अंत में प्रसाद वितरित किया गया। कथा श्रवण के लिये आज जन सैलाब उमड़ा था। 

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