जब दबंगों ने स्कूल के अंदर घुसकर विद्यालय के अध्यापकों की मौजूदगी में बच्चों पर किया जानलेवा हमला …

★ बच्चों के साथ आधा दर्जन से अधिक दबंगों ने की बेरहमी से मारपीट, कई बच्चे घायल, मामले की रिपोर्ट दर्ज।
★ विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर लगा प्रश्न चिन्ह, विद्यालय में लगा सीसीटीवी कैमरा घटना के समय बन्द मिला

कालपी (जालौन) – मामला गुरुवार सुबह 7.20 का है, जब मोहल्ला अदलसराय स्थित मोती चंद्र वर्मा शिक्षा निकेतन नामक स्कूल में प्रतिदिन की तरह बच्चे विद्यालय परिसर में उपस्थित थे। कि एकाएक विद्यालय अखाड़े में तब्दील हो गया।

क्या है पूरा मामला :
पुलिस को दी गयी तहरीर व प्राप्त जानकारी के अनुसार मोती चंद्र वर्मा शिक्षा निकेतन विद्यालय में कक्षा छठवीं में पढ़ने वाले अर्समान नामक बच्चे का इसी विद्यालय के सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों ऋतुराज़, सागर, अंकित यादव, निखिल सैनी, विनायक खन्ना आदि बच्चों से कुछ आपसी छिट पुट झगड़ा हुआ, तो अर्समान ने यह शिकायत अपने परिजनों से की, परन्तु छात्र अर्समान के परिजनों ने मामले की शिकायत विद्यालय प्रबंधन से ना करते हुए विद्यालय में घुसकर लेडीज़ व जेन्ट्स स्टाफ की मौजूदगी में जबरन अनीस व अरशद सहित लगभग 7 या 8 लोगों ने उक्त बच्चों के साथ बेरहमी से मारपीट को अंजाम दे दिया।

घायल छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया :

जिसमे ऋतुराज़, अंकित यादव, निखिल सैनी व विनायक खन्ना नामक छात्र घायल हो गए। घायल छात्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कालपी में भर्ती कराया गया, प्राप्त जानकारी के अनुसार ऋतुराज़ व अंकित यादव नामक छात्रों को जिला चिकित्सालय उरई के लिए रिफर कर दिया गया है।

स्कूल के अंदर घुसकर इस घटना को अंजाम देने से नगर का माहौल गरमा गया व अन्य स्कूलों में भी भय व्याप्त हो गया। कई स्कूलों के प्रबंधको ने हैरान होकर कोतवाली कालपी पहुँचकर चिंता प्रकट की। अंदर की बात यह है कि कालपी नगर में चल रहे स्कूल उक्त घटना के बाद से विद्यालयों को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
विद्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे सिर्फ शो पीस : 

विद्यालय में आपके बच्चे कितने सुरक्षित है। जो आज की इस घटना से मालूम पड़ गया है। और अगर सुरक्षा व्यवस्था की गई है तो वह सिर्फ दिखावे के लिए है। हालांकि विद्यालय में सीसीटीवी कैमरा था पर चालू नहीं था अगर होता तो शायद उन दबंगों की दबंगी कैमरे में कैद हो जाती।

विद्यालय में इस प्रकार की घटना समूचे विद्यालय प्रबंधन तंत्र पर प्रश्न चिन्ह लगा देती है। आखिर जब या घटना हुई तो सभी स्टाफ एक जुट क्यों नहीं हुए और फौरन पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गयी। अगर ऐसा किया होता तो शायद इतना बड़ा मामला न बनता।

सवाल यह उठता है कि विश्वास नही होता साहब कि हम 21वीं शताब्दी में जी रहे हैं, जहाँ एक ओर बच्चों से एक गिलास पानी मंगवाने को बाल मजदूरी के दायरे में रखा जाता है वहीं मासूम बच्चों के साथ बेरहमी से मारपीट करने जैसे संगीन मामले को महज एक घटना मात्र का रूप देकर गम्भीरता से ना लेते हुए स्कूल प्रबंधन की खामी बतलाकर महज अभियोग भर दर्ज करके कानूनी दांवपेंच के पचड़े में डाल दिया जाता है, यदि इस तरह से विद्यालय असुरक्षित होंगे व पैरवीकर्ता ही ना हो तब तो बेचारे निर्दोष बालकों को क्या पता कि पुलिस अंकल क्या करते हैं व कोर्ट कचहरी नाम की भी कोई चीज़ होती है दुनिया मे।

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