यू.पी. में विधानसभा की सुरक्षा में बड़ी चुक, विधायक की सीट के नीचे मिला विस्‍फोटक … 

उत्तर प्रदेश की विधानसभा की सुरक्षा में बड़ी चुक का मामला सामने आया है. फोरेंसिक रिपोर्ट में कहा गया है कि 12 जुलाई को समाजवादी पार्टी के एक विधायक की सीट से मिला सफ़ेद पाउडर एक खतरनाक विस्फोटक था जिसका इस्तेमाल आतंकवादी करते हैं. इस घटना के बाद सीएम योगी ने इमरजेंसी मीटिंग ली और इसके बाद सदन में बोलते हुए कहा कि ये बड़ी आतंकी साजिश है.

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फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में कहा गया है कि विधानसभा से मिला सफ़ेद पाउडर प्लास्टिक पीईटीएन है. रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को हुए सुरक्षा बैठक बुलाई. इस बैठक में डीजीपी, एडीजी लॉ एंड आर्डर, प्रमुख सचिव गृह और फॉरेंसिक लैब के डायरेक्टर शामिल हैं. फिलहाल अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि यह विस्फोटक विधानसभा में पहुंचा कैसे. इस मामले में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि अभी तक उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

वहीं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर विषय है. मामले की जांच चल रही है. जल्द ही कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन लगातार उत्तर प्रदेश में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में हैं, लेकिन उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा. दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर विषय है. सरकार इस मामले में जनता को बताना चाहिए की यह चूक हुई कैसे. इस सरकार में कानून व्यवस्था एकदम चौपट हो गई है.

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बताया जा रहा है कि संदिग्ध पाउडर अपोजिशन लीडर रामगोव‍िंद चौधरी की सीट के पास म‍िला. सीएम सिक्युरिटी से जुड़े लोगों को सबसे पहले इस पाउडर के होने का पता चला।.इसके बाद उन्होंने सीएम को इसकी जानकारी दी. जिसके बाद सीएम ने शाम 4 बजे भी डीजीपी, प्रिंस‍िपल सेक्रेटरी, असेंबली सेक्रेटरी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर सह‍ित कई सीन‍ियर अफसरों की मीट‍िंग बुलाई थी. यह भी बताया जा रहा है कि बरामद पाउडर की मात्रा 60 ग्राम थी.

क्या होता है PETN ?

पीईटीएन को पेंटाइरिथ्रीटोल टेट्रानाइट्रेट के नाम से जाना जाता है। इसे प्लास्टिक बमों में सर्वाधिक शक्तिशाली और खतरनाक माना जाता है। इसे डिटेक्ट करना बहुत मुश्किल है। इसके अणु बेहद संगठित होते हैं। इसके कुछ ही अणु बाहर के वायु के साथ संपर्क कर पाते हैं। इसलिए कुत्ते या सेंसर तक इसकी पहचान नहीं कर पाते। अल आसिरी द्वारा बनाये गये पीईटीएन बमों की खासियत यह है कि इसे साधारण सीरिंज से भी केमिकल डेटोनेटर के जरिये विस्फोट किया जा सकता है।

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दिल्ली उच्च न्यायालय परिसर में हुए विस्फोट में इसे ही इस्तेमाल किया गया था। वारदातों को अंजाम देने के लिए पीईटीएन आतंकवादियों का सबसे पसंदीदा रसायन रहा है। इस रसायन की खोज जर्मनी की सेना ने प्रथम विश्व युद्ध के समय की थी। आज यह आतंकवादियों की पहली पसंद बन चुका है।

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