​ग्राम पंचायत हुसेपुरा जागीर में पागल कुत्ते के आतंक से पशु पालक खौफजदा …

◆ अब तक आधा दर्जन पशुओं की कुत्ते के काटने से हो चुकी मौत
◆ रात के अंधेरे में कुत्ता पशुओं को बना रहा निशाना

◆ दर्जन पशुओं का चल रहा उपचार

जगम्मनपुर (जालौन) यदुराज सिंह । रामपुरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत हुसेपुरा जागीर में एक पागल कुत्ते के आतंक से गांव के पशुपालक खौफजदा नजर आ रहे हैं। आलम यह है कि दिन भर तो पशु पालक अपने पशुओं की देखरेख करने के लिये करते हैं लेकिन रात के अंधेरे में पागल कुत्ता अपने शिकार पर निकलता है और किसी न किसी जानवर को काट लेता है जिससे उसकी मौत हो जाती है। अब तक कुत्ते के काटने से आधा दर्जन पशुओं की मौत हो चुकी है तो वहीं दर्जन भर से ज्यादा पशुओं का उपचार चल रहा है।
ग्रामीणों की मानें तो गांव में एक पागल कुत्ता बाहर से आ गया है जो एक के बाद एक पशुओं को अपना शिकार बनाकर उन्हें मौत के मुंह तक पहुंचा रहा है। पिछले कई दिनों से पागल कुत्ते ने जिस तरह से बेजान दुधारू पशुओं को निशाना बनाने का क्रम शुरू किया था वह आज भी जारी है। पागल कुत्ते के काटने से गांव के ही रामौतार राठौर की 70 हजार रुपये कीमत की भैंस की मौत हो गयी तो वहीं राजू सेंगर की कीमती जर्सी गाय के साथ ही शिववीर सिंह राठौर की जर्सी गाय सहित कई दुधारू पशुओं की अब तक मौत हो चुकी है। गांव के अनेकों पशुओं को अपना शिकार बना चुका पागल कुत्ता रात के अंधेरे में ही अपने शिकार पर निकलता है। पागल कुत्ते का आतंक गांव के पशु पालकों पर इस कदर हाबी है कि वह अपने पशुओं की पहरेदारी करने को विवश देखे जा रहे हैं। चूंकि ज्यादातर पशुओं को रात के अंधेरे में ही पागल कुत्ते ने अपना शिकार बनाया तो ग्रामीणों ने दिन के उजाले में उसे तलाशना शुरू किया कई दिनों के प्रयासों के बाद भी ग्रामीणों को ऐसा कोई जानवर नजर नहीं आया तो उन्होंने गुपचुप तरीके से अपने दुधारू पशुओं की पहरेदारी शुरू की तो एक दिन उन्होंने एक अनजान पागल कुत्ते को देखा तो उनके पशुआंे को बुरी तरह से काट रहा था जब ग्रामीणों ने उसका पीछा कर उसे पकड़ने का प्रयास किया तो गांव के बाहर भाग जाने में सफल हो गया। बताया जाता है कि पागल कुत्ते ने अब तक डेढ़ दर्जन पशुओं को अपना शिकार बनाया है जिसमें आधा दर्जन दुधारू पशुओं की तो अब तक मौत हो चुकी है तो वहीं दर्जन पशुओं का उपचार चल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने उक्त मामले में पशु चिकित्साधिकारी को भी दूरभाष पर सूचना दी थी लेकिन इसके बाद भी गांव में पशु विभाग की टीम अब तक गांव में नहीं पहुंची है। फिलहाल तो गांव के पशु पालक अपने दुधारू पशुओं की स्वतः ही चैबीस घंटे पहरेदारी करने को विवश देखे जा रहे है।

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