महिला चिकित्सालय में जुगाड़ प्रक्रिया से हो रहा मरीजों का इलाज,

बिना सिफारिश के आए मरीजों को घंटों लगना पड़ता लाइन में 

उरई। अगर आप मुफत इलाज के चक्कर में महिला अस्पताल जा रही हो, तो जरा रुक जाइए। अस्पताल जाने से पहले वहां पर किसी से सिफारिश लगवा लीजिए। अगर ऐसा नहीं किया तो आपको दिन भर लाइन में लगना पड सकता है! जी हां! इन दिनों जिला महिला चिकित्सालय का यही हाल है। यहां पर बिना सिफारिश के आए मरीजों को घंटों लाइन में लगना पड रहा है और सिफारिश वाले मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज किया जा रहा है। इसके चलते आम मरीजों को इलाज कराने के लिए घंटों मशक्कत करनी पड रही है। इससे प्रदेश सरकार की मंशा को भी पलीता लग रहा है।

वैसे तो सरकारी अस्पतालों में सभी मरीजों को समान सुविधा व सम्मान देने का नियम है। पर जिले के महिला चिकित्सालय में यह नियम लागू नहंी होता है। यहां पर केवल उन मरीजों को ही प्राथमिकता के आधार पर पहले देखा जाता है जो किसी सिफारिश या रसूखदार के संपर्क में हों। आम मरीजों को इलाज के लिए दिन-दिन भर लाइन में लगा रहना पडता है। इस व्यवस्था के चलते शुक्रवार को महिला चिकित्सालय में आए मरीजों को में काफी रोष देखने को मिला। यहां पर रोज की तरह शुक्रवार को भी सुबह से ही मरीजों की भीड आनी शुरू हो गई थी। ओपीडी ड्यूटी पर बैठीं डा0 पल्लवी के कमरे के चारों ओर मरीजों की भीड जमा हो गई। इसके बाद शुरू हुआ सिफारिशों का दौर। जो मरीज किसी रसूखदार या अस्पताल कर्मी की सिफारिश से उनके पास आए थे, वह तो एक-एक कर अपना इलाज कराकर चले गए। पर इस चक्कर में बिना सिफारिश वाले आम मरीजों को घंटों लाइन में लगना पडा। इसके चलते वहां पर मौजूद मरीजों में काफी नाराजगी देखने को मिली। मरीजों की नाराजगी को भांपते हुए आम मरीजों को तरजीह देनी शुरू कर दी गई। यह घटनाक्रम केवल आज का नहीं, बल्कि रोजाना यहां पर इसी तरह का नजारा देखने को मिलता है। मरीजों के इलाज में हो रहे भेदभाव के चलते आम लोगों में अस्पताल प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ रही है।

जांचों में भी सिफारिश का खेल

उरई। जिला महिला चिकित्सालय में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जांच कराने में भी काफी मशक्कत करनी पडती है। अगर बिना सिफारिश के कोई मरीज जांच कराने जाता है तो उसे भी घंटों इंतजार करने के लिए कहा जाता है। जबकि सिफारिश वाले मरीजों को सबसे पहले प्राथमिकता के आधार पर जांच की जाती है।

नहीं है इंजेक्शन लगाने की व्यवस्था 

उरई। जिला महिला अस्पताल में इंजेक्शन लगाने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। चिकित्सक द्वारा लिखे गए इंजेक्शन को लगवाने के लिए जब मरीज इंजेक्शन कक्ष में जाते हैं तो उन्हें वहां से बहाना बनाकर टरका दिया जाता है। जिद करने पर वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर दवा बांटने वाली महिलाकर्मी को इंजेक्शन लगाने के लिए बुलाया जाता है। इस जुगाड टेक्नोलाॅजी से ही इंजेक्शन लगाने का काम चल रहा है।

पटरी से उतरीं अस्पताल की व्यवस्थाएं 

उरई। जिला महिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतर चुकी हैं। यहां पर न ही आने वाले मरीज का अगर बिना सिफारिश ठीक ढंग से इलाज हो जाए तो इसे केवल चमत्कार ही माना जाता है। चिकित्सकों की मनमानी व इलाज में होने वाले भेदभाव के चलते जिला महिला चिकित्सालय आम जनमानस की उम्मीदों व शासन की मंशा पर खरा नहीं उतर पा रहा है।

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