​रामपुरा सीएचसी के चिकित्सक डा. प्रधान ने मरीज देखने का रिकार्ड बनाया, 166 गर्भवती महिलाओं सहित कुल 616 रोगी देखे …

★ सुबह 8 से शाम 4 बजे तक ओपीडी की
★ सीएमओ मैडम ने सराहा और खुद भी देखे मरीज 

रामपुरा/जालौन,सत्येन्द्र सिंह राजावत : एक ओर जहां पुरूष और जिला महिला चिकित्सालय में डेढ़ बजे दिन रोगियों के पर्चे बनना बंद हो जाते हैं और ओपीडी कर रहे समस्त डाक्टर दो बजे रवानगी डाल लेते हैं वहीं रामपुरा सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डा. समीर प्रधान प्रातः 8 बजे से शाम चार बजे तक, जब तक कि सारे मरीजों को सम्यक उपचार न मिल जाये तथा उनकी आवश्यक जांचे न हो जाएं रोगियों को देख रहे हैं। ऐसा ही सोमवार 11 सितम्बर 17 को मीडिया के औचक निरीक्षण में पाया  गया। अपरान्ह करीब तीन बजे वहां पहुंची सीएमओ मैडम डा. अल्पना वरतारिया ने भी पाया। उन्होने मौके पर इसके लिए डा. प्रधान की प्रशंसा की और वहां उपस्थित कुछ गर्भवती महिलाओं को देखा तथा उनके ब्लड प्रेसर की जांच करने के साथ गर्भावस्था की स्थितियों की पड़ताल कर शेष जांचे कराई व दवाएं लिखी।                     
प्रिंण्ट मीडिया और इलैक्ट्रानिक मीडिया के लिए यह औचक निरीक्षण चैकाने वाला रहा। अस्पताल के मुख्य द्वार से शुरू विशाल हाल जिसमें स्टील के फोर सीटर पंक्तिबद्ध अवस्था में मरीजों के बैठने के लिए स्थित हैं मरीजों से भरे पड़े थे। जहां डा. प्रधान का कक्ष है के ऊपर दीवार पर लगी विशाल ऐलीडी में आ रहे कार्यक्रम का आनन्द लेते हुए मरीज अपनी पीड़ा को भूले हुए थे। उधर माइक पर रोगी का नाम पुकारा जा रहा था। जिस रोगी का नाम बोला जाता उसे कक्ष में प्रवेश दिया जाता। व्यवस्था के अनुसार दो रोगियोें को प्रवेश दिया जाता और दो रोगी उपचार लेकर बाहर आते तथा अस्पताल के दवा काउंटर पर दवा लेतेे नतीजतन न तो देखने में मारामारी थी और न दवा लेने में। मीडिया ने डा. प्रधान के ओपीडी कक्ष का भी निरीक्षण किया, तब उन्होंने कोई वार्ता नहीं की और मरीज का हाल लेने के साथ उसके वीपी की पड़ताल करते रहे। बाहर चूकि बहुत वड़ी संख्या में मरीज अपनी बारी के इन्तजार में थे। जिससे अस्पताल के शेष निरीक्षण के लिए यह कहते हुए कि आप रोगियों को निबटा लें अभी दो बजने वाले है, आपके फारिग होते ही आपसे वार्ता करेंगें, आपकी आपकी वाईट लेंगे। मीडिया ने लेवर रूम सहित अस्पताल के सारे कक्ष देख डाले। यहां तक कि प्रसाधन केन्द्र तक। प्रत्येक कक्ष-फर्स को लेकर जहां ताजा सफाई जैसा चमक रहा था और रोगियों के बच्चे भी फर्स पर अठखेलियां कर रहे थे, वहीं शौचालय मे भी न तो गन्दी- पीली, गुटखा, थुकी, सिल्ट जमी थी, अपितु बाथरूम आदि में पानी भी जमा नहीं था। मकड़ी के जाले भी पूरे अस्पताल में ढंूढे नहीं मिले। बाद में तब कुछ अधिक हैरत हुई कि इस अस्पताल में एक भी सफाई कर्मचारी की तैनाती नहीं है। एक दम्पति राम अवतार व उसकी पत्नी श्रीमति मुन्नीदेवी और दिलीप कुमार नामक युवक यहीं रहकर यही रहकर न सिर्फ अस्पताल को बेदाग बनाये रखते है, बल्कि मुन्नीदेवी वहां तैनात स्टाफ नर्स का प्रसव कराने मेें सहयोग भी करती है। सम्भवतः इन्हें रोगी कल्याण निधि से मानदेय सुलाभ कराया जा रहा है और यह तीनों मुकाबले में निजी अस्पतालों के भी कान काटे हुए हैं। डा. प्रधान ने अस्पताल में वाटर कूलर की भी व्यवस्था कर रखी है जिससे वहां पेयजल की कोई किल्लत देखने-सुनने को नहीं मिली।

इस समय तक तीन बज चुके थे। ओपीडी में मरीज देखे जा रहे थे अपने पंजीकरण पर्चे के टोकन के अनुसार और माइक से बुलाकर रोगी परीक्षण किया जा रहा था कि एक व्यक्ति को भेजकर हमें बुला लिया गया। सवालों के जवाब में डा. प्रधान ने कहा- हां यहां भिण्ड तथा उरई से भी मरीज आते हैं। क्यों यह वह नहीं कह सकते। चिकित्साधिकारियों की कमी को लेकर कहा यहां आठ चिकित्सक होने चाहिये, कितने हैं यह आप देख रहेें हैं। आयुष चिकित्सक के योगदान को भी उन्होंने सराहा।निवास के  बावत कहा कि इमरजेंसी संचालित रखने के लिए वह स्टाफ सहित अस्पताल में ही रह रहें है। यहां जो आवास बनायें गये हैं वह अपूर्ण हैं। डा. प्रधान ने यह भी कहा कि उन्हे रहने लायक कब बनाया जायेगा पता नहीं। वर्ष 2014 से अधूरे बने पड़े हैं। इस अस्पताल भवन के पीछे जाकर निर्मित किये गये भवनों को देख लेें जिनमें चिकित्सा अधिकारियों तथा कर्मचारियों के भवनखण्ड अलग-अलग साफ दिख जायेंगे तथा यह भी पता चल जायेगा कि इन भवनों को अधूरी बनी अवस्था और बिना बाउंड्री बाल के हैण्ड ओवर कर लिये जाने के पीछे कैसा सुख रहा होगा। डा. प्रधान ने यह भी कहा कि उन्हेें अपने चिकित्सक होने पर गर्व है कि अपनी योग्यता के अनुसार बिना थके आने वाले सारे मरीजों को उपचार दे पा रहेें हैं। अभी साक्षात्कार/वाइट लेकर मीडिया अस्पताल के गेट तक प्रस्थान के लिये पहुंची ही थी कि वहां सीएमओ मैडम की गाड़ी आकर रुकी। उन्हें हमें देखकर थोड़ा अचरज और हर्ष ज्यादा हुआ। फिर यह जानकर कि आज सीएचसी में 166 गर्भवती माताओं का परीक्षण व जांच अमल में आईं और साढ़े चार सौ रोगियों ने उपचार पाया, वह दंग रह गई सीएमओ मैडम ने भी तब शेष महिला मरीजों को देखा और उपचार दिया।

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