​भगवान भरोसे जीवन काट रही बोहदपुरा गौशाला में बंद गायें …

◆ पूरी रात खुले आसमान में रहने को विवश हो रहे बेजुवान
◆ जिम्मेदारों ने नहीं ली सुध, गौदास बाबा गायों का संरक्षण करने में जुटे

उरई/जालौन। हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में जहां लोग अपने घरों से बाहर निकलने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं तो वहीं जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर की दूरी पर पशु पालन विभाग के फार्म हाउस में खुले आसमान के नीचे सैकड़ों गाये भगवान भरोसे जीवन जीने को विवश हो रही हैं। गौशाला में न तो गायों को सर्दी के बचाव के लिये टीनशैड की व्यवस्था आज तक की गयी और न ही पांच लाख रुपये खर्चने केे बाद तारफेसिंग की व्यवस्था पर्याप्त हो सकी है। हां कुल दिन पूर्व जिलाधिकारी ने गायों को जिंदा बने रहने के लिये भूसा की व्यवस्था पशु पालन विभाग से करा दी है जिससे गौमाता अब भूखे पेट नहीं रह रही है। हैरत की बात तो यह है कि जनपद में अनेकों गौभक्त दिन रात गौसेवा की माला जपते रहते हैं तो अनेकों समाजसेवी भी ऐसे हैं जो समाजसेवा के नाम पर सेवा कम और नाम ज्यादा कमाना चाहते हैं वह भी गौसेवा के नाम पर सर्दी के मौसम में रजाईयों में दुबके हुये हैं।

ठंडी हवाओं के बीच जब मीडिया टीम अपरान्ह तीन बजे बोहदपुरा गौशाला में बंद गायों की दशा देखने पहुंची तो वहां पर मुख्य गेट पर एक बोर्ड लगा हुआ था जिसमें 26 मार्च 2016 को 5 लाख रुपये सांसद निधि से निर्गत किये गये जिसमें वहां पर महज तारफेसिंग का कार्य ग्रामीण अभियंत्रण विभाग उरई द्वारा कराया गया था। इसके बाद वहां पर गायों को रहने के लिये कोई इंतजाम नहीं किये गये। जब किसानों ने होहल्ला काटा तो आनन-फानन में उसी गौशाला में लगभग तीन सैकड़ा गायों को बंद करवा कर उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। कुछ दिनों बाद वहां पर गौदास बाबा पहुंच गये औेर फिर उन्होंने गायों को सर्दी से बचाने के लिये प्रयास अपने स्तर से शुरू किये तो अस्थाई व्यवस्था में उन्होंने बल्लियों को लगाकर ऊपर से प्लास्टिक की पन्नी कुछ हिस्से में डलवायी। लेकिन जिस तरह से गायों की संख्या वहां पर वह नाकाफी साबित हो रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी बोहदपुरा स्थिति गौशाला में पहुंचकर गायों की दुर्दशा देखने की जेहमत अब तक नहीं उठायी तो वहीं जनपद के अनेकों गौभक्त ऐसे भी है जो हमेशा दूसरों को गौसेवा करने का उपदेश देते रहते हैं लेकिन अपने स्तर से आर्थिक मदद करने के नाम पर हमेशा पीछे रहते हैं। ताज्जुब तो इस बात का भी है जिला मुख्यालय में समाजसेवियों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही हैं ऐसे ही अनेकों समाजसेवी निकाय चुनाव में ताल ठोककर चुनाव मैदान में उतरे थे और उन्होंने नगरपिता बनने के चक्कर में लाखों रुपये खर्च भी किये थे। लेकिन खुले आसमान में भगवान भरोसे रहने को विवश गायों के संरक्षण व सुरक्षा दिलाने के नाम पर वह भी सर्दीली हवाओं के बीच में रजाईयों में सोते दिखाई दे रहे हैं। आलम यह है कि जनपद में लगभग सभी गौशालाओं में बंद सैकड़ों की संख्या में गायों की दुुर्दशा का यही आलम है कि वह भगवान भरोसे अपना दिन काट र तो अनेकों गायों की सर्दी लगने से मौत तक हो चुकी है। फिलहाल तो जनपद के अधिकारी, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों व गौसेेवक जो कुंभकर्णी नींद में सोये हुये हैं उनकी नींद खुलती है या नहीं यह तो समय ही बतायेगा।

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